Thursday, March 31, 2016

दादी प्रेम



आज रविवार के दिन रीना थक कर चूर हो गई। सुबह से मेहमानों का तांता अब समाप्त हुआ। कुछ देर आराम करना चाहती थी, परंतु आज छुट्टी के दिन उसे आराम नही मिलना था। पुत्र और पुत्रवधु बाजार घूमने चले गए और घर में रीना, राकेश और पौत्र शौर्य रह गए। शौर्य की उम्र साढ़े तीन वर्ष, वह तो बस खेल कूद में मस्त था। दादा राकेश के साथ पौत्र शौर्य समीप के पार्क में घूमने चले गए। शौर्य को झूला झूलने में आनंद आता था। झूला झूलने के बाद दादा-पोता ने पार्क के ट्रैक पर दो चक्कर लगाए। सारा दिन धमा-मस्ती और शाम को पार्क में झूला झूलने और सैर करने के पश्चात शौर्य थक गया और एक बेंच पर बैठ गए।

"शौर्य वो देखो सुन्दर तोते।"
"तोता क्या होता है?"
"वो पेड़ पर हरे रंग के पक्षी बैठे हैं, उनको तोता कहते हैं।"
"कहां हैं दादू?"
"वो पेड़ पर बैठे हैं।"
'मुझे तो नज़र नही रहे?" पेड़ की हरी पत्तियों में हरे रंग के तोते शौर्य को दिखाई नही दे पा रहे थे। तभी दो तोते पेड़ से उड़ कर नीचे झूले की रेलिंग पर बैठ गए।

"शौर्य, वो देखो, झूले के ऊपर बैठे है।"
अब शौर्य को झूले के ऊपर बैठे तोते नज़र गए।
"हां दादू, बहुत सुन्दर हैं।" शौर्य उनको पास से देखने के लिए झूले के पास गया, तब तक तोते उड़ कर दूसरे पेड़ पर बैठ गए।
"दादू देखो फिर उड़ गए।"
"पक्षी तो उड़ते रहते है, वो देखो कितने सारे कबूतर दाना चुग रहे हैं। शौर्य हम लोग जो सैर के लिए पार्क आते है, कबूतरों के लिए बाजरी और मक्का के दाने यहां रखते है और पीने का पानी भी रखा है। कबूतर दाना चुगते हैं और पानी पीते हैं।"

शौर्य कबूतरों को दाना चुगता और पानी पीते देख रहा था तभी रीना का फोन आया कि पार्क से वापिस आते समय सब्ज़ी और फ्रूट लेते आना।

"चलो शौर्य घर चलते हैं।"
"नही दादू, अभी नही।"
"चलो, दादी का फोन है, सब्ज़ी और फ्रूट लेना है।"
"कौन सी सब्ज़ी लेनी है दादू?"
"आलू, टमाटर, प्याज, भिन्डी, खीरा, सीताफल, गोभी और गाजर। फ्रूट में सेब, अनार, चीकू, अंगूर।"

दादा-पोता की जोड़ी सब्ज़ी, फ्रूट के साथ घर लौटती है। दादी रीना मुंह फैला कर सोफे पर बैठी है।
"दादी।" कह कर शौर्य रीना से चिपक गया।
"शौर्य।" रीना ने शौर्य को आलिंगन में लिया परंतु रीना उत्साहित नही थी। कुछ तो सारा दिन मेहमानो के साथ समय बिताने पर थक गई थी और कुछ नाराजगी पुत्र, पुत्रवधु के घूमने के लिए चले जाने के कारण थी।

"नौकरानी बना कर रख दिया है। मेहमानों की पार्टी खत्म हुई और नवाबों की तरह घूमने चले गए। बिखरा घर समेट रही हूं, कोई मदद देना वाला नही। एक दिन नही घूमने जाएंगे, तो क्या हो जाएगा। आजकल की लड़कियों से काम मत कहो। घुमा लो, फिरा लो, काम करने को कहो तब बहाने हज़ार तैयार होते हैं।"
"रीना काम बोलो क्या है, हो जाएगा। धीरे-धीरे सब हो जाएगा। मुझे कहो।" राकेश ने रीना को कहा।
"कुछ नही होना, शौर्य को देखो तुम, शैतानियों में लगा हुआ है। सारी क्राकरी बाहर पड़ी है। कहीं तोड़ दे। मैं पहले क्राकरी अलमारी में रख दूं।" रीना बड़बड़ाती हुई काम में लग गई।

दादा-पोता मस्तियों में लगे हुए थे। शौर्य दादा के कंधे पर चढ़ कर सर में चम्पी करने लगा।
रीना काम समेट कर आई और दादा-पोता की मस्तियां देख कर कुड गई।
"खाना बना रही हूं। मस्तियां बंद करो। जिसको देखो, अपने में मस्त है। मेरी किसी को परवाह नही। नौकरानी भी मेरे से अच्छी है। उसको पता था, मेहमान आने है, महारानी छुट्टी कर गई। बच्चे भी नौ-दो-ग्यारह हो गए। इतना भी नही सोचा कि यह उम्र बुढ़िया के काम करने की है।"

रीना ने खाना डाइनिंग टेबल पर रखा। शौर्य पूरे दिन की धमा-चौकड़ी के बाद थक कर चूर हो चुका था। खाने के प्लेट के पास रखे पानी के गिलास को उठाने के लिए हाथ बढ़ाया और प्लेट उलट गई। दाल की कटोरी डाइनिंग टेबल से नीचे गिर गई। चावल डाइनिंग टेबल पर बिखर गए। खाने की प्लेट गिरते शौर्य दहाड़े मार कर रोने लगा।
"एक तो खाना नीचे गिरा दिया और अब रो क्यों रहा है?"
"दादी गुस्सा कर रही है।" कह कर शौर्य और जोर से रोने लगा।
"चुपचाप रोटी खा। रो क्यों रहा है?"
रोते-रोते शौर्य बोला "कैसे रोटी खाऊं। सारी गिर गई।"
रीना रसोई से दाल चावल दूसरी प्लेट में लाती है। "शौर्य, अब चुपचाप दाल चावल खाओ। थके हुए हो, कुछ होश नही है। खाना खाओ और चुपचाप सो जाओ।"
"खा तो रहा हूं। गुस्सा क्यों कर रहे हो?" कह कर शौर्य दहाड़े मार कर रोने लगा।
राकेश ने शौर्य को पानी दिया "शौर्य रोते नही हैं। थोडा पानी पी लो।"

थकान के कारण शौर्य के हाथ से पानी का गिलास छूट गया और पानी डाइनिंग टेबल के नीचे फ़ैल गया। गिलास गिरते फिर शौर्य रोने लगा।
"चुप, खाना खा।" रीना ने डांट लगाई।
"मैं नही खाऊंगा।" कह कर शौर्य डाइनिंग टेबल से उतर कर सोफे पर बैठ कर रोने लगा।
रीना रसोई से आई और शौर्य को खाना खिलाने लगी। "चुप करके खाना खा ले, मम्मी होती तो दो थप्पड़ भी लगा देती।"
"गुस्सा क्यों कर रहे हो। खा तो रहा हूं।"
"चुपचाप खाना खा कर दादू के साथ सो जाओ। बहुत थके हुए हुए हो।"

शौर्य ने रोते हुए खाना खाया और फिर दादा राकेश के साथ बेडरूम में चला गया। बिस्तर पर लेते हुए शौर्य ने पूछा "दादी गुस्सा क्यों कर रही थी?"
"तुमने प्लेट गिरा दी फिर पानी गिरा दिया। तुम्हारा ध्यान खेलने में था और सारा दिन खेलने के बाद तुम थक गए थे। दादी कह रही थी कि खाना खा कर सो जाओ। तुम थके हुए हो, चलो अब सो जाओ।"
"दादू पहले एक कहानी सुनाओ।"

शौर्य प्रतिदिन रात को दादा राकेश से सोने से पहले कहानी सुनता था। राकेश शौर्य को रामायण, कृष्ण, ध्रुव की कहानियों के साथ पंजतंत्र की कहानियां सुनाते हैं। राकेश शौर्य को कहानी सुना रहे थे तभी रीना कटोरी में रसगुल्ले लेकर आई। शौर्य को रसगुल्ले बहुत अच्छे लगते हैं। रीना का गुस्सा समाप्त हो गया था, वह समझती थी कि किसी और पर का गुस्सा बिना वजह छोटे नन्हे बालक शौर्य पर उतर गया। रीना शौर्य पर अपनी जान छिड़कती थी, अधिक देर तक उस पर नाराज़ नही रह सकती थी। तीन कटोरियों में एक-एक रसगुल्ला लाई।

"यह रसगुल्ला कौन सा बच्चा खाता है।"
"दादी कटोरी में क्या है?"
"उठ कर देखो।"

शौर्य झट से उठ कर कटोरी दादी के हाथ से खींचता है। कटोरी में से चाशनी छलक कर बिस्तर पर गिरती है। शौर्य रसगुल्ला खा रहा है और दादी रीना बिस्तर से चाशनी साफ़ कर रही है।

"रुक शैतान, तेरी शैतानियां नही रुकेंगी। तेरी तो पिटाई हो जाये।"

शौर्य ने दादी को देखा, वो मुस्कुरा रही थी। मुस्कुराती दादी को देख शौर्य दादी का स्नेह समझ गया। उसने चाशनी वाले मुंह से दादी को चूमा। दादी के गाल पर शौर्य ने चाशनी लगा दी। दादी और पोता स्नेह के आलिंगन में बंध गए। दादी का प्रेम पोते शौर्य पर उमड़ रहा था। वह अपनी सारे दिन की थकान भूल गई। उसका गुस्सा पौत्र की शैतानियों में गायब हो गया। दादी और पोता एक दूसरे से चिपके आलिंगन में बंधे बिस्तर पर लुडक गए।





Post a Comment

कब आ रहे हो

" कब आ रहे हो ?" " अभी तो कुछ कह नही सकता। " " मेरा दिल नही लगता। जल्दी आओ। " " बस...