Monday, March 07, 2016

लिव-इन



राकेश की नींद खुली। एकदम अंधेरा था, वह समझ गया कि सुबह नही हुई। मोबाइल में समय देखा। दो बज कर दस मिनट। ख़ुशी हुई कि अभी तीन-चार घंटे आराम से सो सकता है। उठ कर बाथरूम गया सू-सू करने। सू-सू करने के बाद बिस्तर पर लेटा कि आहट से रीना की नींद खुली।
"कितने बजे हैं?"
"सवा दो।"
"बहुत ख़ुशी मिलती है जब रात को नींद खुले और पता चले कि अभी तो आराम से तीन-घंटे सो सकते हो।" कह कर रीना भी बाथरूम सू-सू करने गई। रीना बाथरूम से कर बिस्तर पर लेटी और राकेश ने रीना को बाहों में ले लिया।
"यह क्या कर रहे हो?"
"प्रेम।"
"टाइम देखा है?"
"देख लिया, प्रेम का समय है। रात के ढाई बजे, प्रेम का उत्तम समय है।"
"प्रभात समय प्रभु वंदना के लिए होता है, तुम्हारे प्रेम के लिए नहीं।"
"अभी डेढ़ घंटे बाद प्रभु वंदना का समय होगा उससे पहले प्रेम का उत्तम समय है।"
"सुबह नींद नही खुलेगी।"
"ऑफिस की छुट्टी है, शनिवार फोर्थ सैटरडे।" कह कर राकेश ने रीना को अपनी तरफ खींचा।

सुबह सात बजे रीना ने राकेश को उठाया "उठो, कब तक सोते रहोगे?"
"कितने बजे हैं?"
"पौने नौ।"
पौने नौ सुन कर राकेश ने आंखें खोली और मलते हुए कहा। "अरे पहले क्यों नही उठाया।"
"अब उठ जाओ, सात बजे है, ऐसे सोते रह गए तो पौने नौ भी बज जाएंगे।"
"हद कर दी रीना तुमने तो डरा दिया।"
"छुट्टी का दिन है, कोई काम हो तो बताओ जो छूट गया।"
"छूटा तो नही फिर भी हम छुट्टी वाले दिन भी समय से उठते है।"
"अब ब्रश कर लो, मैं चाय बना रही हूं।"

राकेश ने बिस्तर छोड़ा, ब्रश किया तब तक रीना ने चाय बना ली। बिस्कुट के साथ चाय की ट्रे बिस्तर पर रखी। एक कप खुद के लिए और एक राकेश के लिए बनाया। राकेश ने चाय की चुस्कियां लेनी शुरू की।
"रीना, नींद नही खुल रही, चाय पीकर भी पूरी तरावट के साथ जिस्म नहीं है।"
"रात को जागोगे तब सुबह नींद कैसे खुलेगी।"
"जागना भी कई बार अनिवार्य होता है।"
"कोई माता रानी का जागरण तो कर नहीं रहे थे, जो जागना अनिवार्य था।"
"फिर भी कुछ कार्य जाग कर ही होते है।"
"छुट्टी का दिन है, ऑफिस जाना नही, सो जाओ। थोड़ी देर बाद उठ जाना।"
"अब नींद आएगी नही। स्नान करता हूं तभी नींद खुलेगी।"
"ठीक है अभी चाय पी है, दस पंद्रह मिनट बाद स्नान करना।"

राकेश बिस्तर पर अधलेटा हो जाता है और रीना रसोई के काम में व्यस्त हो जाती है। आधे घंटे बाद राकेश स्नान करके आता है। रीना समाचारपत्र पढ़ रही है। राकेश सोफे पर रीना के पास बैठता है और दूसरा समाचारपत्र पढ़ने के लिए उठता है।

"रीना स्नान करने के पश्चात ठीक लग रहा है। पूरा बदन स्फूर्ति से लबालब हो गया।"
"चाय पिओगे?"
"अपने लिए बना रही हो तब एक कप पी लूंगा।"
"इच्छा है तब बताओ। मेरे ऊपर निर्भर मत रहो।"
"फिर बना दो।" कह कर राकेश ने अखबार पढ़ने के लिए उठाया। रीना चाय के साथ मक्खन टोस्ट भी ले आई।
"टोस्ट भी बना लाई।"
"ले लो, नाश्ता एक घंटे बाद करेंगे।"

दोनों राकेश और रीना चाय पीते हुए अखबार पढ़ते हैं।

"राकेश यह खबर पढ़ी?"
"कौन सी?"
"एक लड़की ने तीन साल लिव-इन में रहने के बाद रेप का केस लड़के के ऊपर दायर किया कि तीन साल तक वह लड़का जिसके साथ रह रही थी उसके साथ रेप करता रहा।"
"रीना अच्छी खबर है, पूरी पढ़ते है फिर चाय पर चर्चा करते है।"
"चाय और नहीं मिलेगी, जो कप हाथ में है, उसके अलावा और नही। कितनी चाय पिओगे?"
"ठीक है और चाय नही पीते।"

राकेश ने पूरी खबर विस्तार से पढ़ी "रीना लड़की की उम्र तीस वर्ष है और लड़के की भी तीस वर्ष है। दोनों हम उम्र है और एक ही ऑफिस में काम करते है और पिछले तीन वर्षो से एक साथ लिव-इन में रह रहे हैं। मकान मालिक उन्हें पति-पत्नी समझता है, क्योंकि कुंवारे और लिव-इन वालो को किराये पर मकान नही मिलता। तीन वर्ष तक हम बिस्तर रहे और रेप का आरोप लगा दिया, मेरी समझ से बाहर है यह केस।"
"तीस वर्ष की लड़की को महिला कहें यही उचित है। तीस वर्ष की महिला जो उच्च पद पर आसीन है कोई दूध पीती छोटी बच्ची तो है नही कि बहलाह फुसलाह के रेप कर दिया, तीन वर्ष तक बच्ची डरती रही। राकेश यहां आपसी सहमति का केस है कि जब दोनों पक्ष सोच समझ कर आपस में एक साथ रह रहे हैं और शारीरिक संबंध आपसी सहमति से बना रहे हैं, तब रेप का आधार एकदम अनुचित है।"
"लड़की ने आरोप लगाया है कि लड़के ने धोखा दिया है। शादी के वायदे से मुकर गया है इसलिए रेप है।"
"वास्तव में देखा जाए तो यह रेप का नहीं अपितु धोखाधड़ी का केस बनता है कि शादी से मुकर गया।"
"रीना लड़की ने सोच समझ कर रेप का केस बनाया क्योंकि रेप पर सजा सख्त है और धोखाधड़ी की मामूली। यह दबाव भी है कि लड़का शादी करे।"
"राकेश कारण जो भी हो, यह तो जग जाहिर है, सबको पता है कि शादी के बाहर या बिना शादी के शारीरिक संबंध परेशानी देते है, चाहे जल्दी दें या देर से। हर स्याना व्यक्ति इसके लिए मना करता है और यही कारण है विवाह का। विवाह की संस्था बनी है पुरुष और स्त्री की कुदरती जरूरतों और इच्छाओं की पूर्ति के लिए। आजकल की युवा पीड़ी इस विवाह को झंझट समझती है कि कौन इसके दायरे में बंधे। लिव-इन में आज़ादी है। जब चाहे एक के साथ रहो, फिर छोड़ दो और किसी और को पकड़ लो। विवाह से बाहर आने पर कई बंधन है। आसानी से तलाक भी नही होता।"
"रीना इसीलिए आजकल के युवा लिव-इन में रहते हैं।"
"राकेश यह तो व्यक्तिगत सोच है कि आप किस तरीके से ज़िन्दगी जीना चाहते हैं। विवाहित जीवन, एकाकी जीवन या लिव-इन में। अपनी सोच अपना जीवन।"
"रीना लिव-इन आजकल का नया फैशन है। युवा जो अच्छा कमाते है, परिवार से दूर दूसरे शहर रहते है, उन पर परिवार की कोई जिम्मेदारी नही होती। शादी का दबाव बनाने वाला कोई नही होता। बिना किसी पारिवारिक दायित्व के रहते हैं। लिव-इन में तो बच्चों का दायित्व होता है जिस कारण उनको संबंधो में बांधने के लिए कोई ताकत नही होती।"
"राकेश तभी आज एक के साथ तो कल किसी और के साथ।"
"रीना इस केस में लड़के के परिवार ने शादी का दबाव बनाया और लड़के के मां-बाप उसके पास रहने आये। मां-बाप के समझाने के बाद लड़का उनकी पसंद की लड़की से शादी को तैयार हो गया और मां-बाप के साथ अपने घर चला गया शादी करने। लड़का कह कर गया कि तीन-चार दिन में मां-बाप को घर छोड़ वापिस जायेगा, पर आया नही। तब लड़की ने रेप का केस कर दिया ताकि लड़का शादी कर सके और उसके साथ रहे या उससे शादी करे।"
"राकेश लड़के के मां-बाप का तर्क है कि जो लड़की बिना शादी के लड़के के साथ संबंध में है उसका चरित्र पसंद नही आया। चरित्र के कारण वह पसंद नही आई। आज भी हमारे समाज में लिव-इन को अच्छी नज़र से नही देखा जाता है। शादी से पहले या शादी के बाहर संबंधों को बुरा कहा जाता है और चरित्रहीन का ठप्पा भी लगता है।"
"रीना हम चाहे जितना पढ़ लिख गए हों, अपने को आधुनिक कहें, लिव-इन में रहें परंतु पश्चिम के देशों, अमेरिका और यूरोप जैसी सोच नही बना पा रहे हैं। अभी भी परंपरा आधुनिकता पर हावी है। विवाह को परंपरागत तरीके से संपन्न करते है। लड़के ने लिव-इन से बाहर हो कर किसी और लड़की से विवाह की सोची और लड़की यह बर्दास्त नही कर सकी और लड़के पर रेप का केस कर दिया।"
"रेप के केस से उस लड़के की शादी बाधित हुई। पुलिस केस बना। जेल जाना पड़ा। प्रश्न यह उठता है कि क्या लड़के और लड़की के संबंध दुबारा सामान्य हो सकेंगे?"
"बिलकुल नही, दोनों के संबंध टूटे समझो। हो सकता है कि पुलिस के दबाव से लड़का लड़की से शादी को तैयार ही भी जाए परंतु सौहार्द वातावरण में नही रह सकेंगे। कुछ समय पश्चात तलाक भी हो सकता है। कोर्ट के चक्कर में समय बीतेगा, तो नौकरी में ध्यान रहेगा ही घर पर। इधर के और उधर के।"
"राकेश जब दो जन लिव-इन में रहते है, वे सोच समझ कर लिव-इन का रिश्ता अपनाते हैं। वयस्क किसी दबाव में नही होते, आज़ाद रहते है तभी लिव-इन के रिश्ते को अपनाते हैं। वे अच्छी तरह समझते हैं कि विवाह के बाद जिम्मेदारियां बढ़ती हैं जिनको वे अपनाना नही चाहते हैं। एकदम सौ प्रतिशत आज़ादी के कुछ फायदे हैं तो नुकसान भी।"
"रीना अब इस केस में तो कोर्ट के चक्कर ही नज़र आते हैं मुझे। तारीख पर तारीख, वकीलों के मजे। लिव-इन का जितना आनन्द उठाना था, ले लिया, अब उसके परिणाम भुगतने होंगे।"
"अच्छे या बुरे।"
"रीना मेरी सोच के मुताबिक बुरे परिणाम होंगे बाकि तो लिव-इन में रहने वाले समझे।"
"राकेश नाश्ते का समय हो रहा है।"
"रीना हमारी तो शादी के अच्छे परिणाम है। प्रेम ही प्रेम।"
"हां राकेश बाबू जब रात में नींद खुले प्रेम ही प्रेम।"
"हां रीना जी, प्रेम ही सफल विवाह की कुंजी है।"
"और नाश्ता?"
"अच्छा नाश्ता प्रेम को अधिक गाड़ा करता है।"
"लिव-इन में क्या नाश्ता नही करते जो खटास जाती है।"
"यह तो लिव-इन में रहने वाले जाने पर तुम नाश्ता प्रेम से बनाती हो जिससे प्रेम गाड़ा होता जा रहा है।"

रीना रसोई में नाश्ता बनाने जाती है और राकेश अखबार रख कर टीवी ऑन करता है।


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