Wednesday, June 29, 2016

मेरे घर के आगे श्याम


मेरे घर के आगे श्याम, तेरा मंदिर बन जाए।
जब खिड़की खोलूं तो तेरा दर्शन हो जाए।।

जब होगी आरती तेरी, घंटी यह सुनाई देगी,
मुझे रोज सवेरे तेरी सूरत यह दिखाई देगी।
जब भजन करे कोई, मुझे को भी सुन जाए,
मेरे घर के आगे श्याम, तेरा मंदिर बन जाए।
जब खिड़की खोलूं तो तेरा दर्शन हो जाए।।

मैं आते-जाते कान्हा तुझको प्रणाम करूंगी,
जो मेरे लायक होगा, मैं तेरा काम करूंगी।
तेरी सेवा करने से, मेरी किस्मत खुल जाए,
मेरे घर के आगे श्याम, तेरा मंदिर बन जाए।
जब खिड़की खोलूं तो तेरा दर्शन हो जाए।।

नजदीक रहेंगे दोनों और आना-जाना रहेगा,
हम दोनों का श्याम बस एक ठिकाना होगा।
बस साथ रहें हम दोनों, जल्दी वह दिन आए,
मेरे घर के आगे श्याम, तेरा मंदिर बन जाए।
जब खिड़की खोलूं तो तेरा दर्शन हो जाए।।

परंपरागत भजन


Monday, June 27, 2016

नोट्स



गुजरांवाला टाउन पहुंच कर घर के बाहर इंद्रजीत ने कार रोकने को कहा।
"घर गया।"
इंदु ने घर के बाहर एक कोने पर कार रोकी। घर के सामने खाली मैदान था, जहां पार्क बनना था लेकिन अभी बना नही था। उसी मैदान में कार रोकी। दोपहर के समय कॉलोनी में सन्नाटा था। सभी घरों के अंदर थे। इंद्रजीत का एक मंजिल का घर था। गेट बंद था, उसको खोल कर इंद्रजीत इंदु के साथ घर के अंदर गया। बरामदे में दो कुर्सियां पड़ी थी। इंद्रजीत ने घंटी बजाई। मां सो रही थी, छोटे भाई नरेंद्र ने दरवाज़ा खोला। नरेंद्र स्कूल से वापिस कर म्यूजिक सुन रहा था। इंद्रजीत के साथ एक सुन्दर हसीन लड़की को देख कर नरेंद्र थोडा हैरान हो गया।

"भाई ये कौन है?"
इंद्रजीत ने इंदु का नरेंद्र से परिचय करवाया।
"इंदु यह मेरा छोटा भाई नरेंद्र है और नरेंद्र ये हैं इंदु। इंदु मेरे साथ कॉलेज में पढ़ती है। मेरी क्लास में है और नोट्स लेने आई है।"

नरेंद्र ने इंदु को ऊपर से नीचे तक बड़े ध्यान से देखा, बोला कुछ नहीं, फिर चला गया। इंद्रजीत और इंदु अंदर इंद्रजीत के कमरे में चले गए। कमरे में एक तरफ छोटा सा बिस्तर और दूसरी तरफ एक अलमारी, टेबल और कुर्सी थी। अलमारी में इंद्रजीत के कपडे थे। टेबल पर उसकी किताबे, कापियां पड़ी थी। इंद्रजीत ने पंखा चलाया और खुद बिस्तर पर बैठ गया और कुर्सी इंदु को बैठने के लिए दी। इंदु ने कमरे का निरीक्षण किया। एक साधारण कमरा, जिसकी सफेदी भी दो-तीन वर्ष पहले हुई थी। इंद्रजीत की टेबल के ऊपर एक कैलेंडर टंगा हुआ था। कैलेंडर पर खूबसूरत कृष्ण-राधा की तस्वीर एकदम सजीव लग रही थी, मानो अभी बोल पड़ेंगे। बिस्तर पर रेडियो रखा था।

नरेंद्र इस बात पर हैरान था कि संजीदा इंद्रजीत जो लड़कियों से दूर रहता था, घर एक बला की खूबसूरत हसीना के साथ आया है। उसके पेट में यह बात हजम नही हुई और उसने मां को उठाया।

"क्या है, थोड़ी देर आराम करने दे।" मां ने झल्ला कर कहा।
"मां, आराम करने का समय नही है। भैया के कमरे में जाकर देखो, कौन है? नरेंद्र ने मां के कान में फुसफुसा कर कहा।
"पहेलियां मत बुझा, सीधी बात कर, एक तो दोपहर की नींद ख़राब कर दी।"
"भैया के कमरे में जाकर देखो, नींद क्या है, चैन भी उड़ जाएगा। दिल धड़कने लगेगा, कि भैया बदल गए है। मैं तो कहूंगा कि खोटा सिक्का चल पड़ा है।" नरेंद्र की रहस्यमयी बातें सुन कर मां ने बिस्तर छोड़ा। उसकी आंखो में अभी भी नींद थी। अलसाई अवस्था में मां इंद्रजीत के कमरे में गई और इंदु को देख आश्चर्यचकित हो गई। इंदु की खूबसूरती देखती रह गई।

इंदु ने मां को नमस्ते कहा।
"बैठो, बैठो।" क्या नाम है बेटे तुम्हारा? मां ने बात करने का बहाना ढूंढा।
"मां, ये इंदु है, मेरे साथ कॉलेज में पढ़ती है। मेरे नोट्स लेने आई है।" इंद्रजीत ने झेंपते हुए कहा।

तभी नरेंद्र कमरे में गया। उसने चुटकी ली " भैया कॉलेज में नोट्स दे देते। इतनी दूर घर लाए।"
इंद्रजीत तो चुप रहा, नरेंद्र की चुटकी इंदु समझ गई। "मैं तो पंद्रह दिन से नोट्स मांग रही हूं, हर रोज कोई कोई बहाना बना देते थे, इसलिए आज खुद इंद्रजीत के साथ आई कि अब नोट्स देने में कोई बहाना बनाए।" इंदु ने मुस्कुराते हुए कहा।

इंद्रजीत थोडा झेंप गया और अलमारी खोल कर नोट्स निकालने लगा। हालांकि उसे मालूम था कि नोट्स कहां रखे हुए है, परन्तु उसने समय लिया, ऊपर से नीचे तक पूरी अलमारी में ढूंढा और फिर कागजों का पुलिंदा निकाल कर टेबल पर रखा।

"इंदु, कौन से सब्जेक्ट के नोट्स चाहियें?" इंद्रजीत ने इंदु से पूछा।
इंदु और इंद्रजीत नोट्स में उलझ गए। विषय पर बातों करते देख नरेंद्र कमरे से चला गया।
"इंदु चाय लोगी? इंद्रजीत ने इंदु से पूछा।
इंदु ने मना कर दिया।
"तुम बैठो, मैं चाय बनाता हूं। इस समय मैं अपनी और मां के लिए चाय बनाता हूं।" कह कर इंद्रजीत रसोई में चाय बनाने के लिए चला गया।
इंदु भी इंद्रजीत के पीछे रसोई में गई। इंद्रजीत चाय बनाने लगा।
"तुम तो सब काम कर लेते हो। पढाई में नंबर एक और घर के काम भी करते हो। चाय बनाना। और क्या-क्या बना लेते हो? इंदु ने इंद्रजीत को कहा।
"बस, कोई खास नही, छोटे-छोटे काम करता रहता हूं।"
"और क्या बना लेते हो?"
"चाय, कॉफी, दाल-चावल, आलू की सब्ज़ी।"
"बहुत कुछ बनाते हो, मुझे तो कुछ नही आता। चाय भी नही। घर में नौकर हैं, वोही रसोई में काम करते हैं।" इंदु एक अमीर परिवार की इकलौती लड़की, काम करने की कभी जरूरत ही नही पड़ी।

चाय बन कर तैयार हो गई थी। एक कप और बिस्कुट मां को उनके कमरे में दी और दो कप चाय और बिस्कुट अपने कमरे में अपने और इंदु के लिए।
चाय की चुस्की लेते हुए इंदु ने कहा "चाय तो अच्छी बनाई है। कड़क है, मजा गया।"
"और पीनी है? अभी गरम केतली में रखी है।"
"नही, और नही। अब नोट्स दे दो।"

इंद्रजीत ने इंदु को नोट्स दिए। नोट्स लेने के पश्चात इंदु जाने के उठी। तभी मां भी कमरे में गई। मां की चाय भी समाप्त हो गई थी। मां को देख कर इंद्रजीत चुप हो गया और इंदु चलने के लिए उठ खड़ी हुई। मां ने बैठने के लिए कहा लेकिन इंदु ने पढाई की बात कही कि थोड़े दिन बाद पेपर देने है और इंद्रजीत के नोट्स बहुत काम आएंगे।

इंदु कमरे से बाहर गई। इंद्रजीत भी उसके साथ बाहर गया। मां इंदु को देखती रही। मां इंदु की खूबसूरती के साथ उसकी बातों और व्यवहार को परख रही थी।
बातों-बातों में इंदु, इंद्रजीत और मां घर के बाहर गए। इंदु कार में बैठ गई। मां की मौजूदगी में कुछ नही कहा, सिर्फ बाय कह कर कार स्टार्ट की।

मां इंदु को जाते देख रही थी। नरेंद्र भी मां के साथ खड़ा हो कर इंद्रजीत को देख रहा था। इंदु की कार रवाना हो गई। जब कार आंख से ओझल हो गई तब इंद्रजीत घर की ओर बढ़ा। घर के गेट पर नरेंद्र ने छेड़ा।

"भाई कॉलेज में लड़कियों से खूब दोस्ती कर रहे हो। स्कूल में तो दूर रहते थे।"

"मेरी दोस्त नही है। फर्स्ट इयर में तो इसका ग्रुप मेरा मजाक उडाता था। इसके सभी दोस्त या तो फेल हो गए हैं या कम्पार्टमेंट। खुद इंदु के दो सब्जेक्ट में कम्पार्टमेंट है। खुद तो कभीं नोट्स बनाए नही, इसलिए नोट्स लेने आई थी। पिछले पंद्रह दिनों से पीछे पड़ी थी। मैं जान-बूझ कर नोट्स नही दे रहा था। आज पीछे पढ़ गई कि घर से नोट्स ले लेगी। जब घर गई तो नोट्स देने पड़े।"

"खुद कार चलाती है, अमीर होगी? मां ने इंद्रजीत से पूछा।
"बहुत अमीर है। लेकिन हमने क्या करना है।" इंद्रजीत ने बात टाली और अंदर कमरे में चला गया।


अकेलापन

सुबह के सात बजे सुरिंदर कमरे में समाचारपत्र पढ़ रहे थे उनके पुत्र ने एक वर्षीय पौत्र को सुरिंदर की गोद मे दिया। ...