Friday, June 03, 2016

नाथ, तुम ब्रह्म

नाथ, तुम ब्रह्म, तुम विष्णु, तुम ईश, तुम महेश,
तुम आदि, तुम अंत, तुम अनादि, तुम अशेष।
जल स्थल मरुत व्योम पशु मनुष्य देवलोक
तुम सबों के सृजनहार, हृदयधार त्रिभुवनेश।
तुम एक, तुम पुराण, तुम अनन्त सुख-सोपान
तुम ज्ञान, तुम प्राण, तुम मोक्षधाम।


परंपरागत भजन
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