Saturday, July 30, 2016

ओ मोर मुकुट वाले

मोर मुकुट वाले, तेरी याद सताती है,
हिचकी पे हिचकी, ब्रजदेश को जाती है।
मोर मुकुट वाले, तेरी याद सताती है,

अधरों पे धरी मुरली हमें घर से बुलाती है।
लगता है ऐसा, तुम पास में रहते हो,
हर श्वास में रहते हो, विश्वास में रहते हो।
आंखों के झरोखों से आंसू बरसाती है,
मोर मुकुट वाले, तेरी याद सताती है,
अधरों पे धरी मुरली हमें घर से बुलाती है।

मनुआ है गरीब बड़ा, नादान यह भोला है,
माया के झरोखों ने हरी इसको रोला है।
मेरे जीवन की नैया डूबी चली जाती है,
मोर मुकुट वाले, तेरी याद सताती है,
अधरों पे धरी मुरली हमें घर से बुलाती है।

फरियादी हूं मैं नन्द नंदन, तेरा दास हूं दीवाना,
कानों में पड़ा होगा, मुझ दास का अफसाना,
मेरे मुरली मनोहर को क्या मेरी याद आती है।
मोर मुकुट वाले, तेरी याद सताती है,
अधरों पे धरी मुरली हमें घर से बुलाती है।

परंपरागत भजन


Thursday, July 28, 2016

मेरी आस यही अरदास यही


मेरी आस यही अरदास यही
मैं अपनी कहानी सुनाया करुं
मेरी इसमें ख़ुशी श्याम रूठा करो
मैं अकेले में तुमको मनाया करुं

कोई पागल कहे या दीवाना कहे
मुझे बहशी सारा जमाना कहे
मेरे रोने पे आये जो तुझ को हंसी
तो मैं रो-रो के तुझको हंसाया करुं
मेरी इसमें ख़ुशी श्याम रूठा करो
मैं अकेले में तुमको मनाया करुं

मैं कैसे मिटा दूं तेरी चाह को
अपनी पलकों से झाड़ू तेरी राह को
तेरे चरणों की धूलि को चन्दन समझ
रोज माथे पे अपने लगाया करुं
मेरी इसमें ख़ुशी श्याम रूठा करो
मैं अकेले में तुमको मनाया करुं

क्या चीज है जो सेवा में तेरी
चढ़ जाये स्वयं तुझ पर भी मेरी
मैं पुष्प बना कर दिल अपना
चरणों में तेरे चढ़ाया करुं
मेरी इसमें ख़ुशी श्याम रूठा करो
मैं अकेले में तुमको मनाया करुं


परंपरागत भजन

Monday, July 25, 2016

मिला दो श्याम से ऊधो

मिला दो श्याम से ऊधो, तेरा गुण हम भी गावेंगे।
मुकुट सिर मोर पंखन का, मकर कुंडल है कानों में,
मनोहर रूप मोहन का, देख दिल को रिझावेंगे।
मिला दो श्याम से ऊधो, तेरा गुण हम भी गावेंगे।

हम को छोड़ गिरधारी, गए जब से नहीं आये,
चरण में शीश धर कर के, फिर उनको मानवेंगे।
मिला दो श्याम से ऊधो, तेरा गुण हम भी गावेंगे।

प्रीत हमसे लगाकर के, बिसारा नन्द नंदन ने,
खता क्या हो गई हम से, अर्ज अपनी सुनावेंगें।
मिला दो श्याम से ऊधो, तेरा गुण हम भी गावेंगे।

कभी फिर आप गोकुल में, हमें दर्शन दिलाएंगे,
कहे मोहन हम दिल से, नही कभी उनको भुलायेंगे।
मिला दो श्याम से ऊधो, तेरा गुण हम भी गावेंगे।


परंपरागत भजन

न जाओ छोड़ कर मोहन

न जाओ छोड़ कर मोहन, याद में हम तो तड़पेंगे
दुखेंगे नैन बिन तेरे, विरह हम सह न पाएंगे।

तड़पती राधिका रानी, बिलखती यशोदा मईया है।
दुःखी वह नन्द बाबा हैं, कहां जाने कन्हैया है,
कहें ये ग्वाल बिन तेरे, न हम गैय्या चरायेंगे।
न जाओ छोड़ कर मोहन, याद में हम तो तड़पेंगे
दुखेंगे नैन बिन तेरे, विरह हम सह न पाएंगे।

कन्हैया लेके जाते हो, क्रूर हमको सताते हो,
काम क्या कंस को इनसे, हमें क्यों न बताते हो,
न जाने देंगे ब्रज से हम, न मथुरा श्याम जायेंगे।
न जाओ छोड़ कर मोहन, याद में हम तो तड़पेंगे
दुखेंगे नैन बिन तेरे, विरह हम सह न पाएंगे।

यह वंशी वट रहे सूना, यह यमुना का किनारा है,
कदम्ब पर कौन चढ़ कर के चुराये दिल हमारा है,
कहे यों मोहन बिन तेरे, श्याम हम जी न पाएंगे।
न जाओ छोड़ कर मोहन, याद में हम तो तड़पेंगे
दुखेंगे नैन बिन तेरे, विरह हम सह न पाएंगे।

परंपरागत भजन


Monday, July 18, 2016

ऐ श्याम तेरी मुरली


श्याम तेरी मुरली, घायल कर जाती है।
मुस्कान तेरी मीठी, दिल को चुराती है।।

जो होती सोने की तो क्या करते तुम मोहन।
यह बांस की होकर के, इतना तड़पाती है।।
श्याम तेरी मुरली, घायल कर जाती है।
मुस्कान तेरी मीठी, दिल को चुराती है।।

तुम गोरे होते तो, क्या करते तुम मोहन।
तेरे काले रंग पर भी, दुनिया मर जाती है।।
श्याम तेरी मुरली, घायल कर जाती है।
मुस्कान तेरी मीठी, दिल को चुराती है।।

तुम जमुना पे आते हो और रास रचाते हो।
राधा को मनाने की, अदा तुमको आती है।।
श्याम तेरी मुरली, घायल कर जाती है।
मुस्कान तेरी मीठी, दिल को चुराती है।।

तुम माखन चुराते हो, ग्वालों को खिलाते हो।
तुम्हे चोरी करने की, आदत ही पुरानी है।।
श्याम तेरी मुरली, घायल कर जाती है।
मुस्कान तेरी मीठी, दिल को चुराती है।।

मुरली जब बजती है, सौतन सी लगती है।
मेरा तो दिल यह, छलनी कर जाती है।
श्याम तेरी मुरली, घायल कर जाती है।
मुस्कान तेरी मीठी, दिल को चुराती है।।


परंपरागत भजन

मतभेद

पांच वर्षीय अचिंत घर के बाहर पड़ोस के बच्चों के साथ खेल रहा था। खेलते - खेलते दो बच्चे अचिंत की मां के पास शिकायत ...