Monday, July 18, 2016

ऐ श्याम तेरी मुरली


श्याम तेरी मुरली, घायल कर जाती है।
मुस्कान तेरी मीठी, दिल को चुराती है।।

जो होती सोने की तो क्या करते तुम मोहन।
यह बांस की होकर के, इतना तड़पाती है।।
श्याम तेरी मुरली, घायल कर जाती है।
मुस्कान तेरी मीठी, दिल को चुराती है।।

तुम गोरे होते तो, क्या करते तुम मोहन।
तेरे काले रंग पर भी, दुनिया मर जाती है।।
श्याम तेरी मुरली, घायल कर जाती है।
मुस्कान तेरी मीठी, दिल को चुराती है।।

तुम जमुना पे आते हो और रास रचाते हो।
राधा को मनाने की, अदा तुमको आती है।।
श्याम तेरी मुरली, घायल कर जाती है।
मुस्कान तेरी मीठी, दिल को चुराती है।।

तुम माखन चुराते हो, ग्वालों को खिलाते हो।
तुम्हे चोरी करने की, आदत ही पुरानी है।।
श्याम तेरी मुरली, घायल कर जाती है।
मुस्कान तेरी मीठी, दिल को चुराती है।।

मुरली जब बजती है, सौतन सी लगती है।
मेरा तो दिल यह, छलनी कर जाती है।
श्याम तेरी मुरली, घायल कर जाती है।
मुस्कान तेरी मीठी, दिल को चुराती है।।


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