Saturday, July 30, 2016

ओ मोर मुकुट वाले

मोर मुकुट वाले, तेरी याद सताती है,
हिचकी पे हिचकी, ब्रजदेश को जाती है।
मोर मुकुट वाले, तेरी याद सताती है,

अधरों पे धरी मुरली हमें घर से बुलाती है।
लगता है ऐसा, तुम पास में रहते हो,
हर श्वास में रहते हो, विश्वास में रहते हो।
आंखों के झरोखों से आंसू बरसाती है,
मोर मुकुट वाले, तेरी याद सताती है,
अधरों पे धरी मुरली हमें घर से बुलाती है।

मनुआ है गरीब बड़ा, नादान यह भोला है,
माया के झरोखों ने हरी इसको रोला है।
मेरे जीवन की नैया डूबी चली जाती है,
मोर मुकुट वाले, तेरी याद सताती है,
अधरों पे धरी मुरली हमें घर से बुलाती है।

फरियादी हूं मैं नन्द नंदन, तेरा दास हूं दीवाना,
कानों में पड़ा होगा, मुझ दास का अफसाना,
मेरे मुरली मनोहर को क्या मेरी याद आती है।
मोर मुकुट वाले, तेरी याद सताती है,
अधरों पे धरी मुरली हमें घर से बुलाती है।

परंपरागत भजन


Post a Comment

कब आ रहे हो

" कब आ रहे हो ?" " अभी तो कुछ कह नही सकता। " " मेरा दिल नही लगता। जल्दी आओ। " " बस...