Monday, July 04, 2016

गोबिन्द मेरी यह प्राथना


गोबिन्द मेरी यह प्राथना है,
भूलूं न मैं नाम कभी तुम्हारा।
निष्काम हो के दिन रात गाऊं,
गोबिन्द दामोदर माधवेति।
हे कृष्ण, हे माधव, हे सखेती।

देहान्त काले तुम्ही सामने हो,
बंसी बजाते मन को लुभाते,
गाता यही मैं तन नाथ त्यागूं,
गोबिन्द दामोदर माधवेति।
हे कृष्ण, हे माधव, हे सखेती।

प्यारे जरा तो मन में विचारो,
क्या साथ लाये, क्या ले चलोगे,
यही साथ देगा, इसी को पुकारो,
गोबिन्द दामोदर माधवेति।
हे कृष्ण, हे माधव, हे सखेती।


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