Tuesday, August 16, 2016

मधुबन की लताओं में


मधुबन की लताओं में, घनश्याम तुझे देखूं।
घनघोर घटाओं में, घनश्याम तुझे देखूं।।

यमुना का किनारा हो, चंचल सी धारा हो,
होठों पे धरी मुरली, घनश्याम तुझे देखूं।
मधुबन की लताओं में, घनश्याम तुझे देखूं।
घनघोर घटाओं में, घनश्याम तुझे देखूं।।

जब मुरली बजाते हो, मंद-मंद मुस्कराते हो,
गोपियों को बुलाते हुए, घनश्याम तुझे देखूं।
मधुबन की लताओं में, घनश्याम तुझे देखूं।
घनघोर घटाओं में, घनश्याम तुझे देखूं।।

संध्या या सवेरा हो, दिन हो या अंधेरा हो,
सो जाऊं तो सपनो में, घनश्याम तुझे देखूं।
मधुबन की लताओं में, घनश्याम तुझे देखूं।
घनघोर घटाओं में, घनश्याम तुझे देखूं।।

तिरछे ही खड़े हो नटवर, तिरछा ही मुकुट सिर पर,
यों रास रचाते हुए घनश्याम तुझे देखूं।
मधुबन की लताओं में, घनश्याम तुझे देखूं।
घनघोर घटाओं में, घनश्याम तुझे देखूं।।

भव सिंधु में जब भगवन, नैय्या मेरी डगमग हो,
पतवार लिए तत्पर, घनश्याम तुझे देखूं।
मधुबन की लताओं में, घनश्याम तुझे देखूं।
घनघोर घटाओं में, घनश्याम तुझे देखूं।।

परंपरागत भजन



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