Monday, August 22, 2016

बस इतनी तमन्ना है


बस इतनी तमन्ना है, हे श्याम तुम्हें देखूं
घनश्याम तुम्हे देखूं।

सर मुकुट सुहाना हो, माथे तिलक निराला हो,
गल मोतियन माला हो, जब श्याम तुम्हें देखूं।
बस इतनी तमन्ना है, हे श्याम तुम्हें देखूं
घनश्याम तुम्हे देखूं।

कानों में हो बाली, लटके लट घुंघराली,
तेरे अधरों पे हो मुरली, जब श्याम तुम्हें देखूं।
बस इतनी तमन्ना है, हे श्याम तुम्हें देखूं
घनश्याम तुम्हे देखूं।

बाजूबंद बांहों में हो, पैजनियां पांवों में हो,
होठों में हंसी कुछ हो, जब श्याम तुम्हें देखूं।
बस इतनी तमन्ना है, हे श्याम तुम्हें देखूं
घनश्याम तुम्हे देखूं।

दिन हो या अंधेरा हो, चाहे श्याम सवेरा हो,
सोऊं तो सपनों में, जब श्याम तुम्हें देखूं।
बस इतनी तमन्ना है, हे श्याम तुम्हें देखूं
घनश्याम तुम्हे देखूं।

चाहे घर हो नन्द लाला, कीर्तन तो गोपाला,
हर जग के नज़ारे में, जब श्याम तुम्हें देखूं।
बस इतनी तमन्ना है, हे श्याम तुम्हें देखूं
घनश्याम तुम्हे देखूं।

कहता है यह मोहन यह नमन सौगात मुझे दे दो,
जिस ओर नज़र फेरूं, जब श्याम तुम्हें देखूं।
बस इतनी तमन्ना है, हे श्याम तुम्हें देखूं
घनश्याम तुम्हे देखूं।

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