Friday, August 26, 2016

अपेक्षा


आशा, अपेक्षा और उम्मीद किससे और कितनी होनी चाहिए। यह ऐसा प्रश्न आपसे पूछ लिया अब आप भी हैरत में पढ़ गए होगें कि अटपटा प्रश्न क्यों पूछा? कुदरत बड़ी निष्ठुर है, हर कोई चाहता है कि उसकी अपेक्षाओं पर हर कोई उतरे परन्तु किसी की अपेक्षा पर वह नही बल्कि खुद दूसरा ही उतरे। खैर मैं कुछ नही कर सकता, क्या आप कर सकते है?

राकेश अपनी सीट पर बैठ कर काम कर रहा था। बहुत जरुरी काम वह तन्मयता और एकाग्रता से कर रहा था। शाम तक उसको रिपोर्ट तैयार करके ईमेल करनी थी। तभी उसकी तन्मयता और एकाग्रता छिन-भिन्न हो गई। राकेश की सीट के पीछे शिवलाल शर्मा का केबिन है। शिवलाल शर्मा लीगल डिपार्टमेंट के हेड है। उन्होंने फोन पर बात करनी शुरू की। हालांकि केबिन का दरवाजा बंद था, परन्तु फोन पर काफी ऊंची आवाज में बात कर रहे थे जिस कारण राकेश की एकाग्रता भंग हो गई। लैपटॉप पर काम बंद करके चश्मा उतार कर आंखें बंद कर ली।

"पता नही लोग फोन पर इतनी ऊंची आवाज में बात क्यों करते हैं? आवाज थोड़ी नीची होगी तब भी दूसरे को साफ़ सुनाई देगी।" मन ही मन में राकेश बड़बड़ाया। "औरों के काम में बाधा डालते हैं।

तभी कला वहां से गुजरी। उसने प्रिंटर पर कुछ दस्तावेज स्कैन किये और राकेश के पास रुकी।

"क्या बात है राकेश जी, नींद रही है। रात को सोए नही क्या? कला ने मस्ती में पूछा।

"कला तुम्हारे बॉस शर्मा जी फोन पर बात कर रहे हैं और पूरे ऑफिस को सुना रहे है। काम नही करने दे रहे हैं। अंदर जा कर कहो कि फोन पर आवाज नीची रखो।"

कला ने हंस कर कहा। "आप खुद ही कहो। मैंने डांट नही खानी।" और कला अपनी सीट पर बैठने चली गई।

राकेश शर्मा जी की बातें सुनने लगा। जब शर्मा अपनी बात सबको सुना रहा है, तब सुनने में क्या हर्ज है। काम तो होगा नही।

शर्मा फोन पर बात कर रहे थे "मिलना है तो आज-कल में कार्यक्रम बनाइए। मेरा लड़का अभी एक सप्ताह दिल्ली में है, फिर उसने दुबई जाना है। बहुत अच्छी कंपनी ज्वाइन कर रहा है। अरे-अरे हम तो ठहरे साधु प्रवति के। हमारी कोई मांग नही है। लड़का-लड़की एक दूसरे को पसंद कर ले, बस मुझे और कुछ नही चाहिए। लड़की शादी के बाद दुबई जाएगी। हमारा क्या, हम तो दाल रोटी खाने वाले आदमी हैं।"

शर्मा की बातें सुन कर राकेश की एकाग्रता भंग हो चुकी थी, काम उसने सोचा था कि शाम तक समाप्त कर लेगा, लेकिन या तो ऑफिस में देर तक रुकना होगा या फिर घर से काम करना होगा। कल तक काम को पेंडिंग नही रख सकता। राकेश सोचने लगा कि पिछले छः महीने से वह शर्मा को फोन पर बातें करता सुन रहा है कि लड़के की शादी करनी है। अभी तक हुई नही। लड़का दुबई जा रहा है। यह हमें सुनाने के लिए फोन पर ऊंची आवाज में बात करता है। कुछ लोगों की आदत होती है अपना स्टेटस जरुरत से अधिक बढ़ा-चढ़ा कर बताने की। शर्मा भी उस प्रजाति का प्राणी है।

दोपहर के खाने के बाद राकेश कला के पास गया।
"कला एक बात बताओ, आपके बॉस शिवलाल शर्मा हर रोज फोन पर अपने लड़के के रिश्ते की बात करते है। पिछले छः महीने से तो मैं सुन रहा हूं।"
"राकेश जी, होनी भी नही है।" कला ने बहुत धीरे से राकेश के कान में कहा।"
"ऐसी क्या बात है। कोई राज है क्या?" राकेश ने संजीदगी से कला के पास कुर्सी खींचते हुए पूछा।
"खड़ूस है पूरा शर्मा। जैसी लड़की ढूंढ रहा है, ज़िन्दगी में नही मिलेगी। लड़का कुंवारा मरेगा।"
कला की बात सुन कर राकेश को थोड़ी हंसी गई। हंसी दबा कर पूछा। "ऐसी क्या बात है जो लड़की नही मिल रही है।"
"आज के समय में जो खूबियां लड़की में देख रहे हैं, वो तो मिलने से रही।"
"क्या खूबियां चाहिए लड़की में?"
"पहली खूबी चाहिए कि लड़की संपूर्ण शाकाहारी हो।"
"यह तो कोई कठिन शर्त नही है। आजकल तो हर तरफ शाकाहारी बनने की बातें हो रही है। यूरोप और अमेरिका के लोग भी शाकाहारी बन रहे है। भारत में तो शाकाहारी अधिक है। लोग घर में मांस नही बनाते। बाहर जा कर खाते हैं। आप शाकाहारी, मैं शाकाहारी। लड़की शाकाहारी बड़े आराम से मिलेगी।"
"अब दूसरी शर्त सुनो।"
"सुनाओ।"
"लड़की प्याज, लहुसन खाती हो।"
"बहुत मिल जाएंगी। आपने मेरी सब्ज़ी टेस्ट की हुई हैं। बिना प्याज, लहुसन के बनाते हैं। कैसी लगती हैं।"
"आंटी के हाथों में रस है। उनसे बिना प्याज़, लहुसन के सब्जी बनाना सीखना है।"
"इसके लिए घर आना होगा।"
"आपका घर दूर बहुत है।"
"संडे को आओ। हम तो घर ही रहते हैं।"
"आना ही पड़ेगा। फिर शर्मा जी को बताना पड़ेगा कि बिना प्याज, लहुसन के सब्जी बनाने वाली लड़कियों की इस देश में कोई कमी नही है।"
"अच्छा और शर्ते भी बताओ।" राकेश की उत्सुकता बढ़ती जा रही थी।"
"लड़की को खुद खाना बनाना पड़ेगा। घर में नौकरो के हाथ का खाना कोई नही खाता।"
"कला, ऐसी लड़की भी मिल जाएगी। कोई दिक्कत नही। तुम भी खुद खाना बनाती हो। तुम्हारी आंटी भी खाना बनाती है।"
"अब जो शर्त सुना रही हूं, उसको सब शर्तों के साथ मिला कर सोचना कि उनके लड़के की शादी में क्या बाधा है।"
"वोह भी बता दो। तुम बहुत रहस्य बनाती जा रही हो।"
"राकेश जी, वह शर्त है कि लड़की नौकरी करने वाली हो। क्योंकि उनका लड़का दो लाख रुपये महीने की नौकरी करता है तो लड़की भी कम से कम एक लाख रुपये की नौकरी वाली होनी चाहिए।"

राकेश इस शर्त को सुन कर सोचने लगा।
"अब पता चला कि शर्मा जी के लड़के पैंतीस साल में भी कुंवारे बैठे हैं।"
"सही कह रही हो कला तुम।" कह कर राकेश अपनी सीट पर बैठ कर शर्मा जी की शर्तों पर विचार करने लगा। उसका मन काम में नही लग रहा था। काम भी आज ही समाप्त करना था। लगता है रात खराब होगी। घर पर ही काम करना होगा। शाम के छः बजे राकेश ने लैपटॉप उठाया और घर के लिए रवाना हुए

राकेश के हाथ में लैपटॉप देख कर रीना समझ गई कि राकेश को जरुरी काम करना है वरना लैपटॉप ऑफिस से घर राकेश नही लाते।

रात के खाने के बाद राकेश लैपटॉप खोल काम करने लगा।
"राकेश काम कल कर लेना। कल दूसरे शनिवार की छुट्टी है। आराम से काम कर लेना।"
"रीना हालांकि कल दूसरे शनिवार और फिर रविवार की दो छुट्टी हैं पर यह काम आज ही समाप्त कर के आज की तारीख में ईमेल करना है। तय सीमा के अंदर काम करने का बीड़ा लिया तो पूरा करना है। यह ऑफिस में काम समाप्त कर सकता था, परन्तु एक बात हुई और काम पेंडिंग हो गया। कल तुम्हे बात बताऊंगा। बड़ी रोचक बात है।" कह कर राकेश काम करने लगा।

रात के साढ़े ग्यारह बजे राकेश का काम समाप्त हुआ और उसने ईमेल की। रीना तब तक सो चुकी थी। राकेश भी सो गया।

रात का थका राकेश सुबह देर तक सोता रहा। रीना अपने नित्य समयनुसार साढ़े पांच बजे उठ गई। राकेश सात बजे उठा। रीना पूजा कर रही थी। उसके मुख से प्यारा सा भजन सुन कर राकेश भी रीना के स्वर के साथ अपना स्वर मिलाने लगा।

तेरे चरण कमल में श्याम, लिपट जाऊं रज बन के
निशि दिन तेरा दर्शन पाऊं, हर्षित हो मैं हरिगुण गाऊं
मेरी नस-नस बस जा श्याम, बरस जाओ रस बन के।
तेरे चरण कमल में श्याम, लिपट जाऊं रज बन के।

पूजा के बाद रीना ने राकेश को चाय दी। "काम हो गया।"

चाय की  चुस्की लेते हुए राकेश ने उत्तर दिया। "साढ़े ग्यारह बज गए थे। शुक्र है कि कल की तिथि में काम संपन्न हुआ। मैंने कल की तारीख में काम करने का वादा किया था। वादा निभा और निश्चिन्त हो गया।"

"आप कुछ कह रहे थे कि ऑफिस में कुछ हुआ जिस कारण आप काम पूरा नही कर सके।"

राकेश ने शिवलाल शर्मा के लड़के की शादी की शर्तें बताई।

"कितनी उम्र है शर्मा की?"
"होगी बासठ की।"
"लगता है सठिया गया है। साठ की उम्र सठियाने की होती है।"
"क्या कहती हो रीना, क्या मैं सठियाने वाला हूं?"
"राकेश अभी तुम पचपन के हो, पांच वर्ष बाद सठियाने की उम्र आएगी।"
"रीना तुम्हारी क्या पसंद रहेगी, बहू चुनने में।"
"राकेश आज के हालात देख कर मेरी कोई पसंद या अपेक्षा कोई भी नही है कि बहू ऐसी या वैसी होनी चाहिए। जो हमारा लड़का पसंद करेगा, वह सर, आंखों पर।"
"वो शर्मा जी की शर्तों पर विचार?"
"मेरा दिमाग इतना अधिक खराब नही हुआ है कि जो असंभव है उसकी कामना करुं।"
"वैरी गुड रीना।"
"राकेश व्यवहारिक क्या है, हमें यह देखना चाहिए। आजकल हर लड़की नौकरी करती है। जब पूरा दिन नौकरी में बीतेगा, तब उससे घर के काम में सहयोग की उम्मीद रखना ही गलत है। कम से कम आठ घंटे की नौकरी, ऑफिस आने-जाने में एक से दो घंटे, सुबह ऑफिस जाने की तैयारी। बारह घंटे तो यहीं समाप्त। जब थकी लड़की घर आए और उससे यह अपेक्षा कि घर के काम करे। उसे घर के काम के लिए मजबूर किया तो दो ही बातें होगी। पहली बात या तो तलाक और दूसरी बात लड़की अलग घर रहेगी। बूढ़ा-बूढी अलग, बच्चे अलग। आज दस-बीस हज़ार रुपये कमाने वाली लड़की तो घर में हाथ बटाती नही। एक लाख रुपये महीने की तनख्वाह वाली लड़की घर के काम करे, यह तो असंभव है। उच्च पोस्ट पर कार्यरत लड़की को ऑफिस में अतिरिक्त समय भी काम करना पड़ सकता है। बुड्ढ़ा सनकी और सिरफिरा लगता है। लड़का कुंवारा रह जाएगा।"

"मैं भी यही राय रखता हूं। इसी मुद्दे पर कल आधा दिन बीत गया और काम घर कर करना पड़ा।"
"इसी लिए मेरी बात पल्ले बांध लो कि ऐसी किसी बात की अपेक्षा, उम्मीद मत रखो जो असंभव हो।"
"प्रैक्टिकल बनना चाहिए।"
"यस बॉस।"
"उससे थोड़ा दूर रहना।"
"कम्बख्त का केबिन मेरी सीट के पीछे है। तो अपनी सीट बदल सकता हूं ही उस सनकी का केबिन। यह मेरे बस में नही है।"
"फिर उसकी बातें बताया करो।"
"क्यों?" राकेश ने उत्सुकता से पूछा।
"टाइम पास। समय बिताने के लिए विषय मिल जाएगा।" रीना खिलखिला पड़ी।





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कब आ रहे हो

" कब आ रहे हो ?" " अभी तो कुछ कह नही सकता। " " मेरा दिल नही लगता। जल्दी आओ। " " बस...