Monday, September 26, 2016

श्री श्याम वंदना


काम कोई भी कर पाया, घूम लिया संसार में
आखिर मेरा काम हुआ, श्याम के दरबार में।।

क्या कहना दरबार का, यह सच्चा दरबार है,
शीश झुका के देख जरा, फिर तो बेडा पार है,
तेरा संकट दूर करेगा, श्याम पहली बार में।
काम कोई भी कर पाया, घूम लिया संसार में
आखिर मेरा काम हुआ, श्याम के दरबार में।।

जब जब मैंने नाम लिया, तब तब मेरा काम किया,
जब जब नैया डोली है, इसने आकर थाम लिया,
बारह महीने मनती दिवाली, अब मेरे परिवार में।
काम कोई भी कर पाया, घूम लिया संसार में
आखिर मेरा काम हुआ, श्याम के दरबार में।।

इसके पांव पकड़ ले मोहन काम तेरा हो जायेगा,
इसकी कृपा हो जाये तो, तू बैठा मौज उड़ाएगा,
फिर काहे को घूम रहा है, स्वार्थ के संसार में।
काम कोई भी कर पाया, घूम लिया संसार में
आखिर मेरा काम हुआ, श्याम के दरबार में।।

परंपरागत भजन


भगवद भजन की ज्योति

भगवद भजन की ज्योति, ह्रदय में तू जगा ले,
दुनिया की उलझनों से मन को जरा हटा ले।

हासिल यदि है करना, भगवान का सखा पन,
बन आप पहले उसका, फिर अपना उसे बना ले।
भगवद भजन की ज्योति, ह्रदय में तू जगा ले,
दुनिया की उलझनों से मन को जरा हटा ले।

अभ्यास करते करते, धो आत्मा के मल को,
सागर आनंद के में, जी भर के फिर नहा ले।
भगवद भजन की ज्योति, ह्रदय में तू जगा ले,
दुनिया की उलझनों से मन को जरा हटा ले।

बातों से काम पूरा, कोई कभी होता,
वाणी से जो कहा है, करके उसे दिखा ले।
भगवद भजन की ज्योति, ह्रदय में तू जगा ले,
दुनिया की उलझनों से मन को जरा हटा ले।

वेदों के ज्ञान द्वारा, दीदार कर प्रभु का,
दुई का भाव दिल से, अपने जरा हटा ले।
भगवद भजन की ज्योति, ह्रदय में तू जगा ले,
दुनिया की उलझनों से मन को जरा हटा ले।

यह तो नकद का सौदा, मोहन तू जान ले,
इस हाथ से तू धर दे, उस हाथ से उठा ले।
भगवद भजन की ज्योति, ह्रदय में तू जगा ले,
दुनिया की उलझनों से मन को जरा हटा ले।

परंपरागत भजन


जग के झमेले से, कन्हैया बचा ले


चरण चाकरी में, तू मुझको लगा ले।
जग के झमेले से, कन्हैया बचा ले।।

करूंगा मैं सेवा तन मन से तेरी,
शिकायत मिलेगी ना, कभी तुम को मेरी,
जीवन किया है ये तेरे हवाले।
चरण चाकरी में, तू मुझको लगा ले।
जग के झमेले से, कन्हैया बचा ले।।

देगा तू जो भी, खुश हो के लूंगा,
कसम से कन्हैया, कुछ ना कहूंगा,
वैसे भी यह घर तू ही संभाले।
चरण चाकरी में, तू मुझको लगा ले।
जग के झमेले से, कन्हैया बचा ले।।

कभी तार मेरा, टूटे ना तुमसे,
कभी श्याम प्यारे, रूठो ना मुझसे,
सह ना सकूंगा, मैं कोई बहाने।
चरण चाकरी में, तू मुझको लगा ले।
जग के झमेले से, कन्हैया बचा ले।।

जरा सोच मेरा कौन है जहां में,
तू ही बता दे कान्हा, जाऊं कहां मैं,
मोहन यहीं आएगा, जितना घूमा ले।
चरण चाकरी में, तू मुझको लगा ले।
जग के झमेले से, कन्हैया बचा ले।।

परंपरागत भजन


बुढापा

कुछ उम्र में बढ़ गया कुछ जिस्म ढल गया कुछ पुराना हो गया कुछ बुढापा आ गया कुछ अनुभव आ गया कुछ कद्र भी पा गया...