Thursday, September 01, 2016

मेरी बांह पकड़ लो एक बार

मेरी बांह पकड़ लो एक बार
प्रभु एक बार, प्रभु एक बार।

यह जग अति गहरा सागर है
सिर धरी पाप की गागर है
कुछ हल्का कर दो इसका भार
मेरी बांह पकड़ लो एक बार
प्रभु एक बार, प्रभु एक बार।

एक जाल बिछा मोह माया का
एक धोखा कंचन काया का
मेरा कर दो मुक्त विचार
मेरी बांह पकड़ लो एक बार
प्रभु एक बार, प्रभु एक बार।

है कठिन डगर मुश्किल चलना
बलहीन को बल दे दो अपना
हो जाऊं भव से पार
मेरी बांह पकड़ लो एक बार
प्रभु एक बार, प्रभु एक बार।

मैं तो हार गया अपने बल से
निर्दोष बचाओ जग छल से
सौ बार नही बस एक बार
मेरी बांह पकड़ लो एक बार
प्रभु एक बार, प्रभु एक बार।


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