Saturday, September 10, 2016

जब से मोहन गए


जब से मोहन गए दुःख हजारों सहे, क्या बताएं।
हे सखी जानें आएं आएं।।

तान मुरली की मीठी सुना के
गोपी ग्वालों के मन को लुभा के।।
श्याम चल ही दिए, रोते हम रह गए, क्या बताएं।
हे सखी जानें आएं आएं।।

क्यों दिया श्याम हमको बिछोड़ा।
क्यों हमारे दिलों को है तोडा।।
कुछ भी कह सके, कहते भी थक गए, दिल की आहें।
हे सखी जानें आएं आएं।।

श्याम जाते हो तो जाओ।
हमको आज इतना बताओ।।
क्या यही प्रेम था, प्रेम की आग में दिल जलाएं।
हे सखी जानें आएं आएं।।

परंपरागत भजन


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