Monday, September 05, 2016

सुन लीजिये अर्जी मेरी

सुन लीजिये अर्जी मेरी नन्द दुलारे,
बस याद में तुम्हारी दिन कैसे गुजारे।

जब याद मुझे गया बंसी का बजाना,
सब भूल गया श्याम मुझे अपना बेगाना।
भूले से भुलाई गई बांसुरी तेरी,
जीती हूं तेरे नाम के घनश्याम सहारे।
सुन लीजिये अर्जी मेरी नन्द दुलारे,
बस याद में तुम्हारी दिन कैसे गुजारे।

क्यों भूल गए श्याम हमे द्वारका जाके,
क्यों जोग सिखाते हो हमें प्रेम सिखा के।
ये क्या थी खबर लौट के आओगे कान्हा,
क्यों चल दिए भगवान मुझे देके यों लारे।
सुन लीजिये अर्जी मेरी नन्द दुलारे,
बस याद में तुम्हारी दिन कैसे गुजारे।

मेरी तो लगन तुमसे लगी बांसुरी वाले,
इस भक्त की भी लाज प्रभु तेरे हवाले।
कैसे कहूं किससे कहूं अब कौन सुनेगा,
तेरे बिना बिगड़ी को मेरी कौन सुधारे।
सुन लीजिये अर्जी मेरी नन्द दुलारे,
बस याद में तुम्हारी दिन कैसे गुजारे।

परंपरागत भजन


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