Monday, October 03, 2016

कण कण में जो रमा है

कण कण में जो रमा है, हर दिल में है समाया
उसकी उपासना ही कर्तव्य है बताया

दिल सोचता है खुद वह कितना महान होगा
इतना महान जिसने संसार है रचाया
कण कण में जो रमा है, हर दिल में है समाया
उसकी उपासना ही कर्तव्य है बताया

देखा ये तन के पुर्जे करते हैं काम कैसे
जोड़ों के बीच कोई कब्ज़ा नही लगाया
कण कण में जो रमा है, हर दिल में है समाया
उसकी उपासना ही कर्तव्य है बताया

एक पल की रौशनी से सारा जहान चमका
सूरज का एक दीपक आकाश में लगाया
कण कण में जो रमा है, हर दिल में है समाया
उसकी उपासना ही कर्तव्य है बताया

अब तक यह गोल धरती चक्कर लगा रही है
फिरकी बना के कैसी तरकीब से घुमाया
कण कण में जो रमा है, हर दिल में है समाया
उसकी उपासना ही कर्तव्य है बताया

कठपुतलियों का हमने देखा अजब तमाशा
छुप कर किसी ने सबको संकेत से नचाया
कण कण में जो रमा है, हर दिल में है समाया
उसकी उपासना ही कर्तव्य है बताया

हर वक़्त बन के साथी रहता है साथ सबके
नादान मोहन उसको तू अब तक जान पाया
कण कण में जो रमा है, हर दिल में है समाया
उसकी उपासना ही कर्तव्य है बताया

परंपरागत भजन


Post a Comment

मौसम

कुछ मौसम ने ली करवट दिन सुहाना हो गया रिमझिम बूंदें पड़ने लगी आषाढ़ में सावन आ गया गर्म पानी भाप बन कर उड़ गया ...