Friday, October 14, 2016

कुछ और नही चाहूं मुझे गले लगा लेना


मुझे अपना समझ कर के प्रभु आप निभा लेना
कुछ और नही चाहूं मुझे गले लगा लेना।।

उजड़ा हुआ गुलशन हूं, आबाद इसे कर दो,
पिंजड़े का पंछी हूं, आजाद इसे कर दो,
नैया है भंवर में मेरी, इसे पार लगा देना।
मुझे अपना समझ कर के प्रभु आप निभा लेना
कुछ और नही चाहूं मुझे गले लगा लेना।।

किस्मत मेरी सोई है, कुछ करने नही देती,
जब कदम बढ़ाता हूं, यह रोक मुझे लेती,
कर अपनी दया दाता, किस्मत को जगा देना।
मुझे अपना समझ कर के प्रभु आप निभा लेना
कुछ और नही चाहूं मुझे गले लगा लेना।।

दुनिया का सताया हूं, आया हूं तेरे दर पे,
हारा हुआ प्राणी हूं, अब हाथ रखो सिर पे,
दीनों के सहारे हो, मेरी बिगड़ी बना देना।
मुझे अपना समझ कर के प्रभु आप निभा लेना
कुछ और नही चाहूं मुझे गले लगा लेना।।

मोहन को एक तेरा सहारा है,
यही सोच के आया हूं, पकड़ा तेरा द्वारा है,
अपनी बगिया में श्याम, ये फूल सजा लेना।
मुझे अपना समझ कर के प्रभु आप निभा लेना
कुछ और नही चाहूं मुझे गले लगा लेना।।



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