Wednesday, October 12, 2016

ऐसा क्या मुझसे गुनाह हो गया है


ऐसा क्या मुझसे गुनाह हो गया है।
मेरा कन्हैया खफा हो गया है।।

सांवरिया सरकार अर्ज तुमसे यह मेरी है,
अमावस हो या पूनम हो, मेरी हर रात अंधेरी है,
भरोसा था मुझको तेरा कन्हैया
आई मुसीबत तो तू सो गया है।
ऐसा क्या मुझसे गुनाह हो गया है।
मेरा कन्हैया खफा हो गया है।।

किस गलती पर सरकार ये नज़रें झुकाये बैठे हैं,
हम चौखट पे तेरी उम्मीद लगाए बैठे हैं,
बोलो जुबान से कुछ तो मोहन,
आखिर तुम्हे क्या हो गया है।
ऐसा क्या मुझसे गुनाह हो गया है।
मेरा कन्हैया खफा हो गया है।।

दीनों का दिल मोहन बहुत चुपके से रोता है,
श्याम तेरे सिवाय किसे मालूम होता है,
दिल से भुला दे मेरे दिलवर कान्हा,
अनजाने में मुझ से जो हो गया है।
ऐसा क्या मुझसे गुनाह हो गया है।
मेरा कन्हैया खफा हो गया है।।



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