Wednesday, November 02, 2016

मेरे श्याम दया करके, मुझको अपना लेना


मेरे श्याम दया करके, मुझको अपना लेना।
कितनों को निभाया है, मुझको भी निभा लेना।।

सब हार के मैं भगवन, तेरे दर पर आया हूं,
क्या भेंट करुं अर्पण, दो आंसू लाया हूं,
हे दीनबंधु मेरी बिगड़ी को बना देना।
मेरे श्याम दया करके, मुझको अपना लेना।
कितनों को निभाया है, मुझको भी निभा लेना।।

दाता के दर से क्या, कोई खाली जाता है,
बिन मांगे वह सबको कुछ कुछ देता है,
मुझे और ठौर कहीं, चरणों में रख लेना।
मेरे श्याम दया करके, मुझको अपना लेना।
कितनों को निभाया है, मुझको भी निभा लेना।।

तुम अन्तर्यामी हो, घट-घट की समझते हो,
मेरे भावों को पढ़ ली, तुम भाव परखते हो,
तू मेरा है मेरा, इतना ही कह देना।
मेरे श्याम दया करके, मुझको अपना लेना।
कितनों को निभाया है, मुझको भी निभा लेना।।

गर कृपा की होती, आदत जो तेरी प्यारे,
जग झुकता क्यों आकार, हे श्याम तेरे द्वारे,
लाज मोहन की तेरे, हे श्याम बचा लेना।
मेरे श्याम दया करके, मुझको अपना लेना।
कितनों को निभाया है, मुझको भी निभा लेना।।





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