Thursday, November 03, 2016

बंटवारा


सेठ तोलाराम नाम के अनुसार तोल कर दौलत तिजोरी में भर रखी थी। दौलत इतनी कि गिनती भूल जाए गिनते-गिनते। नकद, बैंक बैलेंस, अनगिनत चल और अचल संपत्ति। लेकिन एक बात थी कि अपनी अंटी में अधिकांश दबा कर रखी हुई थी। आयकर बचाने के चक्कर में थोड़ी बहुत बच्चों के नाम कर दी, फिर भी अपने नाम बहुत थी।

तोलाराम के छः बच्चे, तीन पुत्र और तीन पुत्रियां। सबके आगे बच्चे और पौते-पोतियां। तोलाराम चौथी पीढ़ी अपने सामने फलती-फूलती देख रहे थे। उम्र नब्बे की हो गई। शरीर दुर्बल हो गया। अब अधिक काम नही कर पाते थे। दुकान भी जाना छोड़ दिया। घर पर ही रहते थे। अधिकतर आराम करते थे, सोते अधिक थे, जागते कम थे। शरीर कमजोर हो गया परन्तु आवाज में दम था, आवाज नब्बे की उम्र में पूरी कड़क थी। लाठी के सहारे से चलते थे फिर भी अपनी वसीयत नही लिखी। बच्चे कुछ इस विषय में कुछ कहते तब बुड्ढ़ा तोलाराम भड़क जाते और कड़क आवाज में डांटते। सामने तो नही पीठ पीछे बच्चे बाप तोलाराम की बुराई करते कि मर कर अपने साथ लेकर जाएगा पट्ठावसीयत लिख दे नही तो आपस में लड़ाई करवाएगा।

उम्र का तकादा हुआ और तोलाराम बीमार हुए और खाट पकड़ ली।  चार महीने से अस्पताल ही दूसरा घर बन गया और एक दिन तोलाराम ने अंतिम सांस ली और इस दुनिया को अलविदा कह दिया।

तोलाराम के मरने पर सभी बच्चे एकत्रित हो गए। एकत्रित क्या हुए, वो सब तो जमघट लगा कर चार महीने से इस ताक में थे कि कब बुड्ढ़ा सरके और सम्पति का बंटवारा हो। वैसे तो बच्चों ने लगभग तय कर ही रखा था कि किस सम्पति का मालिक कौन होगा, फिर भी वसीयत होने पर हर किसी के मन में यह खटक रहा था कि कोई खटपट हो जाए। जाने कौन अपनी बात से मुकर जाए।

अस्पताल में तोलाराम ने अंतिम सांस ली। रात के समय मृत्यु हुए। अंतिम संस्कार दिन में होते हैं अतः मृत्य शरीर को घर लाया गया और अगले दिन सुबह दस बजे शमशान में अंत्येष्टि का कार्यक्रम तय हुआ।

तोलाराम के तीन बेटों में से दो विनय और भोलाराम अस्पताल में थे और तीसरा बेटा करण टूर पर था। उसने फोन किया कि अंतिम संस्कार उसके आने के बाद ही किया जाए। वह सुबह घर जाएगा। करण ने प्लेन की टिकट सुबह छः बजे की फ्लाइट की बुक कराई। साढ़े आठ बजे करण घर पहुंच गया। विनय और भोलाराम ने करण से कहा कि पिताजी के अंतिम दर्शन कर लो, फिर शमशान ले जा कर दाह संस्कार किया जाए।

"दर्शन हो गए, अब मुझे सम्पति के कागजों के दर्शन करवाओ, जो मुझे मिलेगी।"
"करण, दाह संस्कार के पश्चात बैठ कर बांट लेगें। हम सभी यहीं हैं। भाई, बहनें और जीजा सबकी आपसी सहमति से बंटवारा हो जाएगा। सभी की यही इच्छा है।" विनय ने कहा।

विनय अपने नाम के अनुरूप बहुत विन्रम स्वभाव के थे, जबकि भोलाराम और करण तेज और उग्र स्वभाव के थे।
करण विनय की बात से सहमत नही हुआ। "भाई, लाश कोई गल-सड़ तो नही रही, फिर इतनी जल्दी मत करो। घन्टे-डेढ़ बाद दाह संस्कार हो जाएगा। पहले मुझे यह बता दो कि मेरे हिस्से कौन सी सम्पति है।"
"इसमें सोचने की कोई अधिक बात नही है। हम तीन भाई है, बराबर तीन हिस्से हो जाएंगे।" विनय ने तुरंत कहा।
इतना सुन कर करण का खून खौलने लगा और गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया।
"सारा काम तो मैं करता हूं। हमेशा टूर पर रहता हूं, देश और विदेश। भाई तुम करते क्या हो, किताबे काली करते हो। पता नही क्या लिखते रहते हो?"
"सबका बराबर का योगदान है। मैं हर तरह के करों को बारीकी से देखता हूं कि कहां इनकम टैक्स, वैट, सर्विस टैक्स, कस्टम और एक्साइज ड्यूटी बचानी है, नही तो टैक्स के बोझ में सारी आमदनी निकल जाए। सबसे मुश्किल काम है। इस काम को कम मत आंको।" विनय ने बहुत विन्रमता से कहा।
"अगर मैं मार्किट बनाऊ तो तुम काम क्या करोगे। मेरे काम के बाद तुम्हारा काम शुरू होता है। इसलिए मुझे अधिक चाहिए। यह कोठी, फार्महाउस और एक्सपोर्ट वाली फैक्टरी मुझे चाहिए। पहले कागज पर लिख मेरे नाम करो, दाह संस्कार बाद में होगा।" करण बहुत गुस्से में बोला।

विनय ने करण का गुस्सा देख बहनों और जीजों से कहा कि दाह संस्कार को प्राथमिकता दें, सम्पति का बंटवारा शमशान से आकर सबसे पहले करेंगे।

"सब लोग सुन लो, नाम करण जरूर है मगर दानवीर नही हूं कि अपने हिस्से की सम्पति तुम लोगों में बांट दूं। एक बार लाश को फूंक दिया, फिर किसके दिमाग का क्या मालूम, कहां फिर जाए। मुझे मेरे हिसाब से बंटवारा चाहिए।"

करण के तेवर देख भोलाराम भी बीच में कूद पड़ा। "मैंने भी भोला नही बनना, मुझे भी तीन हिस्से मंजूर नही। बंटवारा अभी हो जाए। करण ठीक कह रहा है। दाह संस्कार बाद में हो जाएगा।"

करण और भोलाराम के तेवर देख कर तीनों बहनों और जीजों ने भी विद्रोह कर दिया कि हिस्से तीन नही, छः हिस्से होंगे। उन्हें ही हिस्सा चाहिए। इतना सुन करण बौखला गया।

"जीजों अपनी औकात में रहो। हिस्सा मांग रहे हो, लड़कियों का कोई हिस्सा नही होता। हमारे परिवार और समाज में शादीशुदा लड़कियों का कोई हिस्सा नही बनता। कान खोल कर सुन लो, एक फूटी कौड़ी नही मिलेगी। सम्पति का बंटवारा मैं करूंगा।"

करण की बातें सुन कर घर में हंगामा मच गया। अर्थी को शमशान ले जाने में देर देख घर में एकत्रित रिश्तेदार, जिनमें चाचे, मामे, मौसी के घर वालों के साथ तीनों बेटे और बेटियों के ससुराल वाले सम्मलित थे, सभी ने बंद दरवाजे को खटखटाया जहां बेटे, बहुएं, बेटियां और जीजा आपस में उलझे हुए थे। रिश्तेदार भी उनकी बहस में कूद पड़े। शाम के चार बज गए, समस्या का कोई समाधान नही निकला। लड़कियों और जीजों ने भी एलान कर दिया कि कानून के अनुसार उनका भी बराबरी का हिस्सा है।

विनय ने सबके सामने हाथ जोड़ विनती की "मृत्य शरीर का अंतिम संस्कार की कोई नही सोच रहा। अंधेरा होने के बाद दाह संस्कार नही होता। यह झगड़ा तो मुझे नही लगता कि समाप्त होगा। अंतिम संस्कार तो करो।"

विनय की पत्नी ने विनय को एक कोने में ले जा कर कहा कि जब किसी को दाह संस्कार में रुचि नही है तब उसे क्यों जल्दी है?"

"जो हमारा फर्ज है, उसे करते हैं। पिता का अंतिम संस्कार विधि विधान से करना एक पुत्र का कर्तव्य है। फर्ज पूरा करते हैं। जो यहां चल रहा है, कुछ हल नही निकलेगा। कोर्ट में केस वर्षो तक लड़ना पड़ेगा। आपसी रजामंदी नही बनेगी। जो जिसके कब्जे में है, उसी का रहेगा। कोर्ट का फैसला आने में दस से पंद्रह वर्ष लग सकते हैं। कोर्ट में जाने का मतलब है दादा केस करे, पोता फैसला पाए।"

विनय की बात सुन कुछ बुजुर्ग आगे बढे। अर्थी को कंधा दिया और शमशान जा कर दाह संस्कार किया। इतने बड़े परिवार के मुखिया के बच्चे सम्पति को लेकर लड़ रहे थे। अभी चिता की राख ठंडी भी नही हुई थी कि वकीलों के साथ कोठी पर बैठे कोर्ट में केस दाखिल करने की रणनीति तैयार हो रही थी। विनय को छोड़ बाकी दो भाई और तीन बहनें वकीलों के साथ केस तैयार कर रहे थे।

चौथे दिन तोलाराम का उठाला सिर्फ औपचारिकता ही था। पांचवे दिन कोर्ट में केस दाखिल हो गए। दसवें दिन विनय हरिद्वार में तोलाराम की अस्थियां विसर्जित कर रहा था और बाकी भाई-बहन कोर्ट में बहस कर रहे थे। तेरहवीं पर विनय क्रिया संपन्न कर रहा था और कोर्ट ने फैसला दिया कि जो जिसके पास है, बेचेगा नही, अंतिम फैसले तक उसका ही अधिकार रहेगा।

क्रिया संपन्न होने के बाद विनय ने पत्नी से कहा। "आराम से रहो, केसों की चिंता कर। केस सुप्रीम कोर्ट तक जाएगा। वकील मौज करेंगे और मेरे भाई-बहन परेशान रहेंगे। मालूम नही कि अंतिम बंटवारे तक कौन जीवित रहता है और कौन क्या पाता है! अभी तो यह घर और फार्महाउस हमारे पास रहेगा जिन पर करण की नजर है, क्योंकि हम रह रहे हैं।"



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