Monday, December 12, 2016

आ दृश्य दिखा दे गुरुदेव

दृश्य दिखा दे गुरुदेव, तुझे तेरे लाल बुलाते हैं,
तुझे रो रो पुकारे मेरे नैन, तुझे तेरे लाल बुलाते हैं।

आंखों के आंसू सूख चुके हैं, अब तो दृश्य दिखा दे,
कब से खड़े दर पर तेरे, मन की प्यास बुझा दे,
तेरी लीला निराली गुरुदेव, तुझे तेरे लाल बुलाते हैं।

बीच भंवर में नैया पड़ी है, आकार पार लगा दे,
तेरे सिवा कोई नही है आकार गले लगा ले,
क्यों देर लगाई गुरुदेव, तुझे तेरे लाल बुलाते हैं।

डूबा रहता हूं उगता में सूरज, गुरु की बदरियां दे छाई,
उजड़ गई कमिया जीवन की, मन की कली मुरझाई,
कर विनती पर बालक अर्ज, तुझे तेरे लाल बुलाते हैं।

बैठे तो तुम हो मन में हमारे, आंखें नही मानती हैं,
एक पल गुरु से ये अब बिछुड़ कर सूना नही चाहती हैं,
बरबस बरसाये नीर, तुझे तेरे लाल बुलाते हैं।


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