Wednesday, December 14, 2016

दुनिया ने चढ़ाया फूल

दुनिया ने चढ़ाया फूल, मैं खुद को चढ़ाने आया हूं,
गुरुदेव तुम्हारे द्वार पे सर्वस्व लुटाने आया हूं।

माला स्वासों की बनाई है, तेरी याद उसी में समाई है,
जन्मों की प्यासी भक्ति को गुरु आज जगाने आया हूं।

मैं की हस्ती मिटाकर के सर्वधर्म का पालन करता हूं,
सत्तगुरु चरण धूल को माथे पे लगाने आया हूं।

वचनों का पालन नित करके आत्म का ज्ञान पाकर के,
आत्मभाव जगाने आया हूं।

दुनिया ने चढ़ाया फूल, मैं खुद को चढ़ाने आया हूं,
गुरुदेव तुम्हारे द्वार पे सर्वस्व लुटाने आया हूं।


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