Monday, December 19, 2016

गौरा तेरे बाबू ने

गौरा तेरे बाबू ने एक यज्ञ रचाया है,
सबको निमंत्रण दिया पर तुम्हें नही बुलाया है।

बेटी घर बाबुल के बिन बुलाए नही जाती है,
आज चली जाओगी कल वापिस भी आना है।
गौरा जी ने जिद कर ली, भोले पीहर पहुंचा दो,
देख के अनादर को गौरा मन में पछताई है।

दरवाजे पे बाबुल मिले, पर मुख से नही बोले,
केवल मिली भैया से उन्हें ह्रदय से लगाया है।
छोटी बहना यूं बोली, तुम भिखारी की पत्नी हो,
बिना निमंत्रण के बिना बुलाये चली आई हो।

सब देवों के यज्ञ में आसान देख,
भोलेजी का आसान देखके अनादर को गौरा यज्ञ में समाई है।
भोले ने कैलाश में सुनी, यज्ञ में दक्ष का सर काट हाहाकर मचाया है।
बकरे का सर काट, दक्ष को लगाया है।
गौरा तेरे बाबुल ने एक यज्ञ रचाया है।


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