Thursday, February 02, 2017

जालसाजी


हर रोज थोक भाव से फ़ोन आते है क्रेडिट कार्ड ले लो, लोन ले लो और भी बहुत इसी तरह के फोन अक्सर परेशान करते रहते है। छुटकारा पाना असंभव है। आपको और मुझको परेशानी होती है लेकिन कइयों को लाभ भी होता है। आपके घर बैठे आपके कार्य हो जाते हैं। एक दिन अरुण अपनी आमदनी और खर्चो का हिसाब लगा रहा था। होम लोन की क़िस्त अधिक है, जब ऋण लिया है उसको चुकाना भी है। तभी मोबाइल पर संदेश आया, सस्ता होम लोन लो या ट्रांसफर करवाओ। क़िस्त कम करवाओ। पहले भी ऐसे सन्देश आते थे, फोन भी अनेकों आते थे, कभी उनपर ध्यान नही दिया, अब की बार फोन आया तब अरुण ने बात की और अपने होम लोन की क़िस्त कम करवाने की इच्छा प्रकट की। बस अपने दिल की बात क्या बताई, फोन के दूसरी और हर समस्या का समाधान था। अगले दिन ही एक सज्जन अरुण से मिले और आकर्षक प्रस्ताव दिया जिसे अरुण ने फ़ौरन स्वीकार कर लिया। प्रस्ताव था कि होम लोन दूसरी कंपनी में ट्रांसफर करवा देंगे। ब्याज दर कम के साथ अधिक समय के लिए जिससे होम लोन की क़िस्त कम हो जाएगी और अतिरिक्त लाभ के साथ दस लाख रूपए का निजी लोन बिना किसी प्रतिभू जमानत के। अरुण को प्रस्ताव पसन्द आया। सारे दस्तावेज दिए और एक सप्ताह में ऋण की मंजूरी गई।

ऋण की मंजूरी देख अरुण हैरान हो गया। अतिरिक्त लोन पास नही हुआ। होम लोन की बैलेंस रकम ट्रांसफर की मंजूरी मिली। निजी लोन भी नही मिला। अरुण ने अपनी नाजरगी ज़ाहिर की और लोन ट्रांसफर नही करवाया। अरुण ने प्रतिभू जमानत के लिए सात चेक दिए थे। उसने चेक वापिसी के लिये कहा। लोन के दस्तावेज के साथ सात चेक सिर्फ बैंक का नाम लिख कर दिए थे, उनपर तो तिथि लिखी ही रकम। नियमों के अनुसार लोन की क़िस्त टूटने पर उन चेकों का इस्तेमाल किया जाता है। एक चेक का इस्तेमाल लोन की फीस के लिए किया और बाकी छः चेक बैंक के पास रहे। अरुण ने कुछ दिन तक बैंक के एजेंट से चेक वापिस करने के कहा परंतु चेक वापिस नही आए। अरुण से एक चूक हो गई। अरुण ने उन बचे हुए छः चेकों का स्टॉप पेमेंट नही करवाया।

इस बात को एक वर्ष हो गया और अरुण भूल चुका था कि उसके छः चेक अभी भी बैंक में पड़े हैं। अरुण की होम लोन की क़िस्त हर महीने की पंद्रह तारीख को कटती थी। एक साल बाद अरुण अपने ऑफिस में काम में व्यस्त था। उसके मोबाइल पर सन्देश आया। आपके खाते से बीस हजार रूपए का चेक पास हो गया है। व्यस्तता के कारण अरुण बैंक के सन्देश पर ध्यान नही दे सका। शाम के समय अरुण ने सन्देश देखे। बीस हजार रूपए का चेक उसने किसी को दिया नही, खाते से कैसे कटे। कहीं बैंक की गलती हो? कल बैंक जाकर बात करते हैं।

अगली सुबह अरुण बैंक गया। चेक उसी ने काटा है। बैंक ने चेक नम्बर बताया और इस श्रृंखला की चेक बुक पिछले वर्ष जारी की थी। चेक किसी लालाराम के नाम से है। अरुण का दिमाग घूम गया। पिछले वर्ष तो चेक बैंक में होम लोन की प्रतिभू जमानत के लिए दिए थे। अरुण ने चेक दिखाने को कहा। चेक देखने के पश्चात अरुण ने माथा पकड़ लिया। बैंक के नाम को खूबसूरती से लालाराम बना दिया। बैंक ने लालाराम के बैंक खाते की जानकारी दी, जिसमें चेक जमा करवाया था। बैंक ने पुलिस रिपोर्ट लिखवाने को कहा। अरुण ने फ़ौरन बाकी के पांच चेकों की स्टॉप पैमेंट करवाई, ताकी उनका दुरूपयोग हो और फ़ौरन बैंक से बाहर आया और पुलिस थाने में रिपोर्ट दर्ज करवा दी।

अरुण ने इस विषय पर अपने ऑफिस के मित्रों से चर्चा की। अरुण ने रकम वापिस मिलने की उम्मीद छोड़ दी। पुलिस इस छोटे से केस में कुछ करेगी उसे उम्मीद नही थी। मित्रों से सलाह के बाद उसने अपने और लालाराम के बैंक में ईमेल के जरिये इस जालसाजी और पुलिस रिपोर्ट की सूचना दी। जिस बैंक से लोन की स्वीकृति आयी थी उसको भी सूचना दी और बचे हुए चेक वापिस करने को कहा।

अरुण के बारम्बार अनुरोध के बावजूद किसी भी बैंक का कोई जवाब नही आया। रकम मिले या मिले कम से कम उस आदमी का तो पता चले जिसने जालसाजी की। अरुण ने पुलिस थाने जाकर रिपोर्ट पर प्रगति की जानकारी मांगी। पुलिस ने उलटे अरुण पर ही दोष मढ़ दिया। अरुण को चेकों की स्टॉप पेमेंट करवानी थी। पुलिस क्या इतने छोटे से बीस हजार की जालसाजी पर कार्रवाई के लिए बैठी है। नेताओं की सुरक्षा और हत्या जैसे गंभीर मामले हैं, पहले उनसे तो फुर्सत मिले।

अरुण ने अपने बैंक को रकम वापस करने को कहा कि बैंक नियमों के अनुसार चेक पर किसी भी प्रकार का परिवर्तन अमान्य है और चेक पास नही होता। बैंक की गलती और लापरवाही से चेक का भुगतान हो गया। सबसे पहले तो लालाराम के बैंक को इस प्रकार का चेक भुगतान के लिए क्लीयरिंग के लिए भेजना नही चाहिए था और दूसरे उसके बैंक को चेक पास नही करना था। दोनों बैंकों की लंबी चुप्पी के बाद अरुण ने बैंकों के नोडल अफसर का दरवाजा खटखटाया। दोनों बैंकों पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए रकम वापिसी का दबाव बनाया। बैंक अरुण को पुलिस से लालाराम को पकड़वाने का दबाव बनाने लगे कि जब पुलिस रिपोर्ट दर्ज है तो पुलिस अपराधी को पकड़ कर रकम वसूलेगी। बैंक इसलिए रकम वापस नही कर रही थी कि बैंक ने तो रकम वापस करनी नही है, उसने तो उस बैंक कर्मचारी से वसूल कर अरुण को देनी है जिसकी गलती और लापरवाई से चेक पास हुआ। बैंक अपने कर्मचारियों का बचाव करता नजर आया।

बैंक की वेबसाइट से अरुण ने लालाराम के बैंक की शाखा का पता मालूम किया। बैंक की शाखा अलीगढ जिले में पलवल अलीगढ रोड पर थी। अरुण ने कानों को हाथ लगाया कि यह क्षेत्र ही बदमाशों का है। वहां जाना खतरे और जोखिम से भरपूर है।

अरुण होम लोन देने वाले के पीछे पड़ गया। बहुत चक्कर लगाये कि बचे चेक वापस कर दे। अब चेक हों तब वापस हों।  चेक सभी गायब थे। लालाराम की मंशा सब चेकों से रकम हड़पने की थी, जो कामयाब नही हुई। एक चेक के बाद बाकी चेकों की स्टॉप पेमेंट करवा गई थी। लालाराम ने दूसरा चेक भी लगाया परंतु स्टॉप पेमेंट की वजह से चेक का भुगतान नही हुआ। बैंक में जिम्मेवारी कौन ले। तीन बैंकों पहला अपना स्वयं का बैंक जिसने भुगतान किया, दूसरा बैंक जहां लालाराम का खाता था, जिसने चेक को क्लीयरिंग में भेजा और तीसरा जहां से चेक चोरी हुए, अरुण एक वर्ष तक चक्कर लगाता रहा। हर संभव कोशिश के बाद भी अरुण को बीस हज़ार नही मिले।
अरुण को एक बात का विश्वास था कि लालाराम जिसने जालसाजी की, उसके मुंह खून लगा हुआ है। वह एक साल से चुप नही बैठा हुआ होगा। उसने अवश्य ही अनेकों  चेक चुरा कर कैश करवा लिए होंगे। हो सकता है कि लालाराम किसी गिरोह का सदस्य हो जो ऐसे काम करता है परंतु कभी कभी यह गिरोह पुलिस के हत्थे जरूर आएगा।

अरुण को अपने बचपन का एक किस्सा याद गया। शायद तीसरी या चौथी कक्षा में पढता था। स्कूल की छुट्टी साढ़े बारह बजे होती थी। छुट्टी होने पर घर वापिस जाने के समय एक लालाजी जो छोटे कद के बेहद दुबले पतले थे, उसी समय अपनी दुकान जाया करते थे। दुकान स्कूल के करीब थी। लालाजी धोती-कुर्ता पहना करते थे। कुछ बड़े लड़के जो ग्यारवी या बारहवीं के छात्र थे लालाजी को परेशान करते थे। लालाजी दुबले पतले और छात्र मोटे हट्टे कट्टे। छात्र लालाजी की धोती खींच लेते थे, जिनसे उनकी धोती ढीली हो जाती थी। धोती खींच कर लड़के खीं-खीं करते हुए भाग जाया करते थे और लालाजी बड़बड़ाते हुए अपनी धोती ठीक करने में व्यस्त हो जाते थे। छात्रों की इस बेहूदा हरकत से लालाजी बहुत परेशान थे परंतु छुटकारा कैसे मिले? एक दिन जब उन छात्रों ने लालाजी की धोती खींची तब लालाजी ने उन छात्रों को पास बुला कर पांच-पांच पैसे के सिक्के इनाम में दिए। (आज के युवावर्ग के लिए-उस जमाने में एक, दो और तीन पैसे के सिक्के भी चलन में थे। 1970-72 तक एक, दो और तीन पैसे के सिक्के चलन में थे और पांच, दस और बीस पैसे भी 1980-85 तक खूब चलन में थे) छात्र खुश कि धोती खींचो और इनाम पाओ। लालाजी से जब लोगों से पूछा कि यह क्या बात हुई कि आप उन हुड़दंगी छात्रों को इनाम दे रहे है जो उनको परेशान करते हैं। लालाजी ने शांत स्वर में उत्तर दिया कि वे दुबले पतले उन मोटे हट्टे कट्टे छात्रों का मुकाबला नही कर सकते लेकिन उनका इनाम एक दिन उन छात्रों को सबक देगा। स्कूल के पास एक पहलवान छोले-कचोड़ी का खोमचा लगाते थे और पहलवान भी धोती-कुर्ता पहनते थे। एक दिन उन छात्रों ने सोचा कि जब मरियल लाला धोती खींचने पर पांच पैसे का सिक्का इनाम में देता है तो इस मोटे पहलवान की धोती खींची जाए। यह शर्तिया अठनी देगा। लालच बुरी बला है। लालच में आकर एक दिन उन छात्रों ने उस मोटे पहलवान की धोती खींच ली। जैसे ही पहलवान की धोती खींची, उस पहलवान ने लपक कर उन छात्रों में से एक को पकड़ लिया। बाकी छात्र भाग लिए। पहलवान ने पकडे हुए छात्र की खूब पिटाई की। पिटते छात्र को बचाने कोई नही आया क्योंकि हर कोई उन हुल्लड़बाज छात्रों से दुखी था।

अब लालाजी ने सबको कहा कि इसी छण के लिए उसने छात्रों को इनाम देना शुरू किया था। बड़े लालच में फंस कर अब पूरी जिंदगी हुल्लड़ नही करेंगे। हुआ भी ऐसा कि उस घटना के पश्चात उन छात्रों ने लालाजी को परेशान करना छोड़ दिया। अब स्कूल की छुट्टी के बाद नजर नीचे किये चुपचाप अपने घर जाते थे।

अरुण को पक्का यकीन था कि उसे पैसे मिले या मिले परंतु किसी रोज वह किसी बड़े काण्ड में जरूर फंसेगा। बैंकों के चक्कर छूट गए।

तीन वर्ष बाद

अरुण ने अपने बीस हजार रुपयों को भुला दिया। उसे उम्मीद नही थी कि कभी पुलिस उसकी रिपोर्ट पर कार्यवाही करेगी।

सर्दियों का रविवार अरुण घर के बाहर कुर्सी पर बैठा धूप सेकते हुए समाचारपत्र पढ़ रहा था। एक पुलिस वाला अरुण के घर का पता पड़ोस से पूछ रहा था। पडोसी ने अरुण की ओर इशारा किया।

पुलिस वाले ने जब बताया कि एक जालसाज पकड़ा गया है जो चेकों पर जालसाजी करता था। एक चेक पर जालसाजी से रकम चुराने पर उसने भी रिपोर्ट करवाई थी।

अरुण को भूली जालसाजी याद गई। उसने पुलिस वाले से पूछा कि क्या उसके पैसे वापस मिलेंगे?

वो तो अदालत तय करेगी। उसके कई बैंक खाते सील कर दिए हैं। तुम्हे अदालत में गवाही देनी होगी और सबूतों के आधार पर अदालत का निर्णय होगा। जालसाज को सजा दिलवाने पर तुम्हारी गवाही की आवश्कयता है। अभी हमने उसे तीन दिन की पुलिस रिमांड पर लिया है। उसने बहुत जालसाजी की है।

अरुण के होंठों पर हलकी मुस्कान आई। चलो आखिर पकड़ा ही गया। मैं तो कमजोर दुबला पतला लाला था। अंत में मोटे पहलवान के हत्थे चढ़ ही गया वह जालसाज।



Post a Comment

नाराजगी

हवाई अड्डे पर समय से बहुत पहले पहुंच गया। जहाज के उड़ने में समय था। दुकानों में रखे सामान देखने लगा। चाहिए तो कुछ ...