Monday, February 27, 2017

मत घबरा





मत घबरा तू बेटे पुस्तकों के बोझ से
यह तो सिर्फ शुरुआत है
आदत बना ले तू बोझ की
रट ले तू सारे ज्ञान को
डिग्रियां ले कर नौकरी पा ले अच्छी सी
याद रख अनलिखे ज्ञान को
जिंदगी खुद एक बोझ है
कभी ग़मों का बोझ है
कभी खुद का बोझ है
कभी परिवार का बोझ है
कभी काम का बोझ है
तभी रखा तुझ पर पुस्तकों का बोझ है
अभी नासमझ तू है
डरता पुस्तकों के बोझ से है
याद कर ले तू मोहन ज्ञान
ज़िन्दगी एक बोझ का है
मत घबरा तू बेटे पुस्तकों के बोझ से

यह तो सिर्फ शुरुआत है
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