Monday, February 13, 2017

कभी तुम को जी भर के देखा नही है

मेरे घर में आओ श्याम, तमन्ना यही है।
कभी तुम को जी भर के देखा नही है।।

तुझे केसर लगाऊं, तुझे चन्दन लगाऊं
मेरे घर में आओ तो गंगा जल से नहलाऊं
रो-रो कर अंखियां कहती यही हैं।
मेरे घर में आओ श्याम, तमन्ना यही है।
कभी तुम को जी भर के देखा नही है।।

मैं तुझको लाड़ लड़ाऊं, तुझे माखन खिलाऊं
तुझे जब नींद आए, लोरी गा कर सुनाऊं
मरने से पहले, मेरी ख्वाहिश यही है।
मेरे घर में आओ श्याम, तमन्ना यही है।
कभी तुम को जी भर के देखा नही है।।

मुझे बतलाओ कन्हैया, वह दिन किस दिन आएगा
नीले घोड़े पर चढ़ कर, तू मेरे घर आएगा
मोहन सारे ही सुख हैं, दुःख बस यही है।
मेरे घर में आओ श्याम, तमन्ना यही है।
कभी तुम को जी भर के देखा नही है।।




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