Friday, March 17, 2017

हमराही


मिला जो वो मुझे हमराही बन गया
सूना जो था जीवन संवर गया
तनहा ज़िन्दगी को गुलज़ार कर गया
जीवन जीने की कला सिखा गया
कभी जीवन में खटास भर गया
कभी जीवन में मिठास भर गया
हमराही जीने के नए अध्याय दे गया
नटखट ज़िन्दगी को गंभीर बना गया
हमराही मेरा नटखट भी है प्यारा भी
जीवन में अनेकों रंग भरता चला गया
हमराही मेरा बालक भी है अध्यापक भी
जिन्दगी के मायने सिखाता चला गया
बड़ा चुलबुल है मेरा हमराही
चहक कर खुशबू बिखेरता चला गया
उफ़ सांझ में अकेला छोड़ गया हमराही
अब उसकी यादों में समय बिताता चला गया



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