Monday, March 27, 2017

स्कूल भी पांच श्रेणियों


सबको शिक्षा मिले। देश का हर नागरिक शिक्षित हो। हर नागरिक को समान अधिकार मिले। सरकार के दावों को हकीकत झुठला देती है। अमीर और गरीब की दूरी हर स्तर पर नजर आती है। समान शिक्षा के सिर्फ कोरे दावे हैं। आज स्कूल भी पांच श्रेणियों में बट चुके हैं। पहली श्रेणी में पंचतारा स्कूल आते है जहां केवल उच्च स्तर के अमीर परिवारों के बच्चे पढ़ते है जो ऑडी, बीएमडब्लू और मर्सिडीज जैसी ब्रांडेड कार में स्कूल आते हैं और गर्मियों की छुट्टियों में विदेश यात्रा पर जाते है। दूसरी श्रेणी में मध्यम वर्ग के बच्चे निजी स्कूल में पढ़ते है जो स्कूल बस में स्कूल पढ़ने जाते हैं। तीसरी श्रेणी सरकारी बाबुओं की है जिनके बच्चे केंद्रीय विद्यालय में पढ़ते है जहां शिक्षा का स्तर बहुत अच्छा है। चौथी श्रेणी सेना अधिकारियों की है जिनके बच्चे आर्मी स्कूल में पढ़ते हैं और आता है पांचवा वर्ग। इस श्रेणी ने गरीब आते हैं जो सरकारी स्कूल में पढता है। गरीब मां-बाप अपने बच्चों को स्कूल में दाखिल करवा कर अपनी इतिश्री समझते है। उनको बच्चों की पढाई से कोई लेना देना नही। बच्चों को खाना, यूनिफार्म और पुस्तकें सभी मुफ्त में मिलता है। तो वे खुद पढ़े हैं और उन्हें बच्चो को पढ़ाने का शौंक होता है। कुछ चुने हुए गिनती के बच्चों पर सरस्वती मेहरबान होती है वे अपने बलबूते पर पढ़ जाते है बाकी जब बारह चौदह वर्ष के होते है, धीरे-धीरे स्कूल से निकलते जाते हैं। अभिभावकों की नजर में अब वे कमाने लायक हो गए हैं। कुछ बच्चों की पढ़ाई में अरुचि और कुछ अभिभाककों की इच्छा कि बच्चे काम में लग जाएं। यहां हम देखते है कि हमारे बच्चे स्कूल जा रहे हैं और कुछ काम पर जा रहे हैं।


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