Tuesday, April 11, 2017

मोबाइल लत


"चलो आज घूमने चलें।" रविवार सुबह चाय पीते हुए रीना ने कहा।
"चलो कहां चले?" राकेश ने चाय की चुस्कियों के बीच पूछा।
"आप रोज मॉल घूमते हो। मॉल घूम कर लंच कर लेंगे।
"मेरा ऑफिस मॉल के पीछे है। शाम को मॉल पार ऑटो पकड़ते हैं। इस कारण मॉल भी घूमना हो जाता है।
बारह बजे राकेश और रीना मॉल के लिए रवाना होते हैं। एक घंटे के सफर के बाद मॉल पहुंचते हैं। थोड़ी देर मॉल में घूमते हैं। रविवार के दिन मॉल में बहुत भीड़ थी।
"कुछ खरीदना है?" राकेश ने रीना से पूछा।
"क्या लें? छोड़ो आज सिर्फ घूमते हैं। बच्चे बड़े हो गए हैं। अब वो अपनी पसंद की खरीदारी करते हैं। तुम कुछ ले लो।"
"क्या लूं? रीना तुम ले लो।"
"चलो एक तुम और एक मैं। खरीदना कुछ नही।"

थोड़ी देर मॉल घूमने के बाद दोनों फ़ूड कोर्ट पहुंचे। फ़ूड कोर्ट खचाखच भरा हुआ था। पांच मिनट बाद एक कोने में चार जनों की एक टेबल खाली हुई। राकेश और रीना बैठ गए। तभी एक नवविवाहित जोड़ा आता है।

"अंकल दो कुर्सी खाली हैं। क्या हम बैठ सकते हैं? आज भीड़ बहुत है।"

राकेश और रीना ने अनुमति दी। लड़की के हाथ चूड़े से भरा था और एकदम दुल्हन की तरह सजी थी। लड़की और लड़का बेहद खूबसूरत थे। उनको देख कर ऐसा प्रतीत होने लगा कि भगवान ने दोनों को सिर्फ एक दूसरे के लिए ही बनाया है।

राकेश और रीना टेबल के एक ओर बैठे थे और नवविवाहित जोड़ा दूसरी ओर। राकेश और रीना एक दूसरे से पूछ रहे थे कि क्या खाएं। पंजाबी खाना, दक्षिण भारतीय या फिर चीनी। फिर दोनों में सहमति बनी चलो थोड़ा-थोड़ा तीनों का स्वाद लिया जाये। रीना टेबल पर बैठी रही और राकेश व्यंजन लेने लगा। राकेश को दस मिनट लगे। रीना सामने बैठे जोडी को देखने लगी। जब से दोनों रीना के सामने बैठे तब से दोनों अपने-अपने मोबाइल में टिक-टिक किये जा रहे थे। दोनों ने कोई बात नही की। बस मोबाइल पर मस्त थे और मुस्कुरा देते। रीना हैरान हो गई कि यह कैसा नवविवाहित जोड़ा है कि कोई बातचीत नही। फ़ूड कोर्ट में बैठे मोबाइल पर टिक-टिक किये जा रहे हैं। क्या खाना है छोड़ो कोई दूसरी बात भी नही। आज के युवाओं को क्या हो गया है। रीना सोचने लगी कि जब उसकी शादी होती थी, ढेरों बातें करते थे। हाथ में हाथ डाले घूमते थे और ये तो मोबाइल में मस्त हैं। तभी राकेश व्यंजन लेकर आया।

रीना ने राकेश को कोहनी मारी और कान में उस जोड़े के बारे में फुसफुसाई। राकेश ने उनको देखा और मुस्कुरा दिया। खाने के साथ राकेश और रीना दोनों को देखते रहे। वो दो युवा अपने मोबाइल पर ही मस्त थे। सामने बैठे राकेश और रीना उनको लगातार देख रहे हैं इस बात से भी दोनों अंजान थे। खाना समाप्ति के पश्चात राकेश और रीना ने टेबल छोड़ी। रीना ने अब उनको कहा।

"बेटे अब हम जा रहे हैं। टेबल खाली है, आप आराम से खाने का लुत्फ़ उठाइए।"

मोबाइल पर मस्त दोनों ने एक स्वर में कहा "थैंक यू आंटी।" दोनों अभी भी मोबाइल पर मस्त थे और सिर्फ मुंह से कहा पर निगाहें मोबाइल में टिकी हुई थी।

रीना ने मुड़ कर देखा। युवक ने मोबाइल पर से बिना निगाहें हटाये पत्नी से पूछा। "क्या लोगी डार्लिंग?
उसने भी मोबाइल पर टिकी निगाहों से उत्तर दिया। "रुको दस मिनट।"
रीना ने राकेश के हाथों में हाथ डाला और आगे बढ़ गई।
"राकेश कितने वर्ष के हो गए तुम।"
"पचपन।"
"और मैं तरेपन की। राकेश वो दोनों तीस के लपेटे में। पीढ़ी का अंतर है या कुछ और?"
"मालूम नही। मुझे तो दोनों मनोरोगी लगते हैं।"
"अच्छा है कि हमारे समय में मोबाइल नही थे।"
"रीना मैं ऑफिस में भी देखता हूं। युवा जितना समय काम करते हैं उससे अधिक मोबाइल पर टिक-टिक करते हैं।"

वो युवा जोड़ा मोबाइल पर ही मस्त था और राकेश और रीना हाथ में हाथ डाले मुस्कुरा कर आगे बढ़ गए।


Post a Comment

मौसम

कुछ मौसम ने ली करवट दिन सुहाना हो गया रिमझिम बूंदें पड़ने लगी आषाढ़ में सावन आ गया गर्म पानी भाप बन कर उड़ गया ...