Tuesday, April 11, 2017

काम की आदत


दोपहर के खाने के बाद चन्दन की तबियत सुस्त होने लगी। बदन टूटने लगा और दर्द भी करने लगा। उसे अहसास हो गया कि बुखार है। काम बंद करके कुर्सी पर आराम करने लगा। सहपाठियों ने घर जाने की सलाह दी। चन्दन ने पैरासिटामोल की एक गोली ली और थोड़ी देर आराम किया। दवा से तबियत में थोड़ा फर्क महसूस हुआ तो चन्दन ऑफिस से घर जाने के लिए रवाना हुआ। घर पहुंचने से पहले डॉक्टर को फोन किया। डॉक्टर अपने क्लिनिक में थे। चन्दन घर पहुंचने से पहले डॉक्टर से क्लिनिक पर मिले।

डॉक्टर चन्दन से उम्र में छोटे थे और चन्दन को अंकल कह कर पुकारते थे।
डॉक्टर - अंकल कैसी तबियत है?
चन्दन ने अपनी तबियत के बारे में बताया। डॉक्टर ने निरिक्षण किया।
डॉक्टर - बुखार 100 डिग्री है और रक्तचाप भी अधिक है। रक्तचाप की दवाई नियमित रूप से लेते हो अंकल?
चन्दन - रक्तचाप की दवा तो हर रोज नियमित रूप से लेता हूं।
डॉक्टर - मैं दवा लिख रहा हूं। तीन दिन तक लो फिर मुझे दिखाना। अगर बुखार तेज हो या उतरे नही तक टेस्ट करवा लेना। मैं लिख देता हूं। आप आराम पूरा करो। ऑफिस से दो दिन की छुट्टी लो तब तबियत जल्दी ठीक होगी।
चन्दन - कोई घबराने की बात तो नही है?
डॉक्टर - अभी तो मौसम का बुखार लग रहा है। दवा पूरी लो और पूरा आराम करो। आंटी कैसी है?"
चन्दन - ठीक है।

चन्दन ने केमिस्ट से दवा ली और घर पहुंचा। चांदनी घर पर नही थी। फोन किया। चांदनी सोसाइटी के मंदिर में थी। एक बच्चे के हाथ घर की चाबी भेज दी।

बच्चा - अंकल चाबी आंटी ने भेजी है। मंदिर में कीर्तन हो रहा है। आंटी एक घंटे बाद आएगी।

चन्दन ने घर का दरवाजा खोला और दवा लेने के पश्चात आराम करने के लिए बिस्तर पर लेट गया और कुछ पल बाद नींद गई।
लगभग डेढ़ घंटे बाद चांदनी घर लौटी।  चन्दन को देख कर बोली - आज जल्दी गए?
चन्दन - हां बुखार हो गया ऑफिस में, इसलिए जल्दी गया।
चांदनी - डॉक्टर के पास चलकर दवा ले लो।
चन्दन - सीधे डॉक्टर के पास गया था। दवा ले ली।
चांदनी - क्या कहा डॉक्टर ने?
चन्दन - दवा से बुखार उतरे तब टेस्ट करवाने को कहा है।
चांदनी - खिचड़ी बना देती हूं। थोड़ा हल्का खाने के बाद जल्दी सो जाओ।

चन्दन सो जाता है। रात के लगभग डेढ़ बजे चन्दन की नींद खुलती है। पसीने से तर बतर चन्दन कंबल को उतार कर एक ओर करता है। बुखार उतर गया था। कमजोरी के कारण कुछ देर करवटें बदल कर फिर से नींद गई। चांदनी सो रही थी। चन्दन ने उसे उठाया नही।
सुबह चांदनी अपनी दिनचर्या के मुताबिक साढ़े पांच बजे उठ गई। चन्दन सो रहा था। लगभग साढ़े आठ बजे चन्दन उठा।

चांदनी - तबियत कैसी है?
चन्दन - कमजोरी बहुत लग रही है।
चांदनी - आज और कल दो दिन ऑफिस से छुट्टी लो। फिर शनिवार, रविवार की छुट्टी। पूरे चार दिन आराम करो।
चन्दन - छुट्टी की ईमेल सबसे पहले भेजता हूं।

चन्दन ने मोबाइल फोन से दो दिन की छुट्टी के लिए ईमेल लिखी और ऑफिस भेज दी और आराम करने लगा।
चांदनी - स्नान कर लो। बदन खुल जाएगा। पसीने से भीगे कपडे भी बदल लो।

थोड़ी देर बाद चन्दन स्नान करके कपडे बदल लेता है। नाश्ते में दलिया खाया और समाचारपत्र पढ़ने लगा। चन्दन ने मुश्किल से साढ़े दस बजे तक आराम किया होगा फिर उसके बाद ऑफिस से एक के बाद एक फोन आने लगे और चन्दन फोन पर ही व्यस्त हो गया। चन्दन ने अपना लैपटॉप भी खोला और काम करने लगा।

चांदनी यह देख कर झुंझुला गई और थर्मामीटर चन्दन के मुंह में डाल दिया। दो मिनट बाद भी जब चांदनी ने थर्मामीटर नही निकाला तब चन्दन ने खुद मुंह से निकाल कर तापमान देखा।
चन्दन - बुखार नही है।
चांदनी - पिछले दो घंटे से देख रही हूं। डॉक्टर ने आराम करने को कहा है और आप यह आराम कर रहे हैं। घर में पूरा दफ्तर खोल लिया है। जब आराम नही करना तब छुट्टी क्यों ली, दफ्तर चले जाओ। टिफिन पैक कर देती हूं।
चन्दन - नाराज क्यों हो गई?
चांदनी - मेरी नाराजगी से कोई फर्क पड़े तब कहूं कि नाराज हूं।
चन्दन - तुम्हे तो मालूम है निजी नौकरी में आदमी का तेल निकाल लेते हैं। काम करना पड़ता है।
चांदनी - मगर तुम इंसान हो, तबियत ठीक नही, कम से कम एक दिन तो बक्श दो। कोई सुपरमैन या भगवान तो हो नही कि बिना रुके हर पल सृष्टि चलानी है।
चन्दन - कोई नही समझता, खास कर जिनके पल्ले दाने ज़रूरत से अधिक होते हैं। हम नौकर ठहरे, मालिक की निगाह में हमारी औकात कुछ नही है। दो-दो साल तनख्वा बढ़ाते नही। जवान लड़के-लड़कियां इसीलिए हर साल दो में नौकरी बदल लेते हैं। उनपर घर के दायित्व नही होते। अब उम्र सत्तावन हो गई है। इस उम्र में नौकरियां भी आसानी से नही मिलती। आजकल युवाओं पर विशेष ध्यान है। चालीस के ऊपर वाले मेरी श्रेणी में गए है। तभी तो काम किये जा रहे हैं।

चन्दन के तर्क सुनकर चांदनी चुप हो गई।

दोपहर में भी चन्दन को आराम नही मिला। थोड़ी थोड़ी देर में फोन बजता रहता। चांदनी कुड़ कर दूसरे कमरे में आराम करने लगी। चन्दन पूरा दिन ऑफिस का काम घर पर करता रहा। बीच में थोड़ी सी झपकी ले लेता था। शाम के छः बजे के बाद चन्दन को काम से फुर्सत मिली।

चन्दन और चांदनी अकेले दिल्ली में रह रहे हैं। पुत्र प्रीत बंगलुरू में और पुत्री शालिनी पुणे में रह रहे हैं। दोनों आईटी कंपनी में कार्यरत है और विवाहित हैं। चन्दन निजी कंपनी में कार्यरत है। उन्नीस वर्ष की उम्र में बीकॉम की डिग्री लेने के तुरन्त बाद चन्दन ने नौकरी करनी शुरू की। घर की आर्थिक स्थिति कमजोर थी। कॉलेज के समय अपनी पढाई का खर्च ट्यूशन की  कमाई से पूरा किया और घर में भी आर्थिक सहयोग दिया। नौकरी के साथ एमकॉम और फिर एमबीए किया। चार-पांच कंपनियां बदली और धीरे-धीरे उन्नति की सीढ़ियां चढ़ते आज चन्दन एक शीर्ष पद पर है। अड़तीस वर्षो के अनुभव के साथ चन्दन का सम्मान कंपनी में सहपाठियों के साथ मैनेजमेंट भी करती है। विन्रम स्वभाव के चन्दन विपरीत परिस्थितियों में भी हंसते हुए काम करते रहते थे। अपने लिए कुछ भी चाह नही रखी। पहले अपने माता-पिता और फिर बच्चों के लिए पूरा जीवन समर्पित कर दिया। अपने लिए शायद ही कुछ मांगा हो चन्दन ने, इसीलिए चांदनी के रूप में जीवनसाथी मिला जिसने चन्दन का पूरा ख्याल रखा।
बीमारी में पूरा दिन चन्दन ऑफिस का काम करता रहा। छः बजे नींद गई। चांदनी ने चन्दन को आराम करने दिया। साढ़े आठ बजे चन्दन उठा।

चांदनी - हाय सुपरमैन कैसे हो?
चन्दन मुस्कुरा दिया, कहा कुछ नही। आराम करने से और दवाई से तबियत में सुधार हुआ।
चन्दन - कुछ बेहतर महसूस हो रहा है।
चांदनी - खाना खा लो फिर रात की दवा खाकर सो जाना। आज तुमने बीमारी में भी दुगना काम किया है। अब जवानी का जोश मत दिखाओ। उम्र के मुताबिक काम करना चाहिए।

चन्दन ने मुस्कुरा कर सर हिला दिया। खाना खाने के बाद चन्दन को नींद नही रही थी। अभी तो सो कर उठा। चांदनी और चन्दन दोनों टीवी सीरियल देखने लगे। साढ़े नौ बजे पुत्र प्रीत का फोन आया। पिता और पुत्र की फोन पर चांदनी बात सुनती रही।
चांदनी - क्या हुआ प्रीत रुपये क्यों मांग रहा था?
चन्दन - कह रहा था कि खर्च अधिक हो गया। मकान बदला, उसका किराया और सिक्योरिटी में खर्च हो गया। कार लोन की क़िस्त भी देनी है।
चांदनी - अच्छी तनख्वा है, मियां-बीवी दोनों कमाते हैं। आखिर खर्च कहां करते हैं। मुझे तो समझ नही आता। इतना कमाने के बाद भी बाप से मांगते शर्म नही आती। फोन मिलाया और रुपये मांग लिया। तुमने मना क्यों नही किया।
चन्दन - कह रहा था उधार दे दो। दो-तीन महीने में वापिस कर देगा।
चांदनी - मैं जैसे समझती नही हूं। उधार मांग कर रुपये लिए किसने वापस करने और बाप ने बेटे से क्या मांगने?
चन्दन - दे देगा।
चांदनी - खर्च सीमित रखें। हमने भी तो दो कमरों में गुजारा किया है। माता-पिता, हम और दो बच्चे। जितनी चादर थी, पैर कभी बाहर नही निकाले। अभी तो कोई उनपर बोझ नही है। कोई जिम्मेदारी नही है तब यह हाल है। छोटे मकान में रह लें, छोटी कार ले लें। अपना रुतबा दिखाना है। झूठी शान के साथ जीना है। घर में खाना बनाना नही, हर रोज होटल में खाना है। महंगे कपडे, क्या बताऊं और।
चन्दन - मैं समझ सकता हूं।
चांदनी - तीन साल में दोनों बच्चों की शादी की। सारी जमा पूंजी खर्च हो गई। घर में सफेदी करवानी है, दीवारों से पपड़ी उतर रही है। हर महीने उसे टालते जा रहे हैं। उनको सब आराम चाहिए। क्या हमें कुछ नही चाहिए?
चन्दन - चाहिए तो लेकिन हमारा बचपन थोड़े अभाव में बिता। हमने सब कुछ स्वयं बनाया। बच्चों को हमने सब कुछ दिया इसीलिए उन्हें अभाव में रहने की आदत नही है।
चांदनी - आप हमेशा तो उनकी मदद कर नही सकते। तीन साल बाद आप रिटायर हो जाओगे तब हम अपना गुजारा कैसे करेंगे। कुछ सोचा है? बच्चों के जो हालात हैं, उनसे मुझे एक रुपये की भी उम्मीद नही है। उन्हें आपकी तनख्वा पता है और यह भी मालूम है कि आप अधिक खर्च करते नही इसीलिए मांग रख दी। उनको इतनी समझ तो आनी चाहिए।
चन्दन - उधार मांग रहा है, वापस कर देगा।
चांदनी - वापस कर देगा। वापस करने के कुछ दिन बाद फिर मांग लेगा। यह सिलसिला चलता रहेगा। मैं बच्चों की मानसिकता समझ रही हूं।
चन्दन - हमारा सब कुछ बच्चों का ही तो है।
चांदनी - मानती हूं कि है परन्तु अपने लिए कुछ रखो नही तो?
चन्दन - दिल छोटा कर। आज पहली बार ऐसा क्यों सोच रही हो?
चांदनी - इसलिए कि उम्र बढ़ती जा रही है और अब अधिक बोझ उठाने की हिम्मत नही है।

चन्दन बात को समझता है परन्तु उसकी आदत। उसने लैपटॉप खोला और इंटरनेट बैंकिंग से रुपये पुत्र के खाते में भेज दिए।



Post a Comment

मदर्स वैक्स म्यूजियम

दफ्तर के कार्य से अक्सर कोलकता जाता रहता हूं। दफ्तर के सहयोगी ने मदर्स वैक्स म्यूजियम की तारीफ करके थोड़ा समय न...