Friday, April 28, 2017

सखा

भीतर है सखा तेरा तू मन टिका के देख
हृदय  में ज्ञान की ज्योति जगा के देख

मन भटक कर जाता है  बाहर की ओर जो
बाहर की ओर से उसे भीतर को मोड़ दो

द्वार बंद करके उसे अपने अंदर खोज के देख
पवित्र साथी है वो उसका सखा बन के देख

खुली आंखों से तू उसकी रचनाएं देख
झूम उठेगा उसकी महिमा को देख

सबसे अच्छा सखा है वो बिगड़ी को बनाए
जीवन को हमेशा रस भक्ति से तू जो सजाए

ईश्वर की वाणी मोहन तू आजमा के देख
भीतर है सखा तेरा तू मन टिका के देख



Post a Comment

कब आ रहे हो

" कब आ रहे हो ?" " अभी तो कुछ कह नही सकता। " " मेरा दिल नही लगता। जल्दी आओ। " " बस...