Friday, April 14, 2017

मेहमान

सुखद था वो पल जब तुम आए थे
ज़िन्दगी गुलज़ार थी जब तुम आए थे

हसीन सपने एक साथ बुने थे
उनको सार्थक करने के प्रयास किये थे

हाथ पकड़ कर साथ चले थे
ज़िन्दगी भर का हमसफर बन कर

तेरे बिन बेस्वाद हो गई है ज़िन्दगी

रुक जाओ चाहे मेहमान बन कर
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