Monday, April 03, 2017

ज़िन्दगी चंद रोज की

ज़िन्दगी चंद रोज की इसमें सहारा कौन है,
कौन है हमदर्द अपना और पराया कौन है।

ये चमन ये फूल ये बुलबुल ये नगमा बहार,
आपही बतलाइये इनमें हमारा कौन है।

कौन से वक्त वो परदे को उठा देता है,
किस कदर लोगों को दीवाना बना देता है।

हम भी दीवाने हैं दिखला दे हमें भी सूरत,
सुनते आते हैं कि रोतो को हंसा देता है।




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