Wednesday, May 17, 2017

नई शुरुआत


मंगलवार की शाम मंदिर में कीर्तन में कमला और विमला मिली। कीर्तन समाप्त होने पर दोनों में बातचीत हुई।
"और कमला बहुत दिनों बाद नजर आई, कुछ कमजोर भी हो गई हो?" विमला ने एक हाथ में प्रसाद का पकड़ा हुआ था और दूसरा हाथ को कमला के कंधे पर रख कर पूछा।
"कुछ नही विमला बस कुछ दिन से तबियत ठीक नही चल रही।"
विमला ने कमला की आंखों में आंखें गाड़ कर पूछा। "कुछ पीली सी लग रही है आंखे?"
"हां पीलिया हो गया था। बिगड़ गया था, बहुत मुश्किल से हाथ आया है। तीन महीने हो गए है, अब तो शरीर पूरा निचुड़ गया है। ऐसा लगता है कि जान है ही नही।" कह कर कमला मंदिर के बाहर बेंच पर बैठ गई।
"बच्चे कैसे हैं?"
"क्या बताऊं, अपनी दुनिया में मस्त हैं। हमारी सुनता कौन है।"
"बच्चों की शादी करनी है या कुंवारा रखना है।"

विमला की यह बात सुन कर कमला बिना कुछ कहे उठ कर चलने लगी तब विमला ने उसका हाथ पकड़ लिया। "कमला मैंने कौन सा जले पर नमक छिड़क दिया जो पतली गली से खिसक रही है। तेरे भले की कह रही हूं।"
इतना सुन कर कमला बैठ गई। बुझे स्वर में कहा "बोल।"
"एक रिश्ता है बात चलाऊं।"
"बड़े का तलाक हो गया। हर कोई पूछता है क्यों हुआ मैंने लड़की को तंग किया होगा। छोटे की जहां बात करो, यही पूछते हैं। अब तो शर्म आती है जवाब देते हुए। कालिख लग गई है।" कहते हुए कमला की आंखों में आंसू गए।
विमला ने कमला के गले ने बाहें डाल कर उसे गले लगाया और बात बढ़ाई। "तू दिल छोटा क्यों करती है। हौसला रख। वैसे मैं तेरे बड़े लड़के की बात कर रही हूं। शादी का इरादा है तो बात चलाऊं?"
शादी की बात सुन कर कमला को थोड़ी राहत महसूस हुई। "क्या बात कर रही है?"
"मैं सच बोल रही हूं। अब तूने तो बताया नही पर हमें खबर मिल ही गई। अब तलाक पर कोर्ट की मुहर लग गई तो कर लड़के की शादी।"
"तू नही बता पर सारी दुनिया को खबर है कि तलाक फाइनल हो गया है और तलाक मिलते ही तेरी बहू ने तो शादी भी कर ली।"

कमला अब सतर्क हो गई "करमजली ने शादी कर ली। मुझे तो पहले ही उसके लक्षण सही नही नजर रहे थे तभी उसने घर नही बसाया। तलाक ले कर मानी। मोटी रकम भी हड़प ली अब यार संग मौज मारेगी।"
कमला की जान में दुगनी ताकत गई। विमला ने उसकी दुखती नस दबा दी "वैसे तू जो इतनी बुराई कर रही है अपनी बहू की इतनी बुरी नही थी। तेजी तो तेरे अंदर भी बहुत थी। दबा कर रखती थी। आजकल की लड़कियां आजादी चाहती है। पिंजरे में नही रह सकती।"
"मैंने कौन सा बांध कर रखा था। कालिख पोत गई मेरे मुंह पर।"
"छोड़ तू इन बातों को कौन दूध का धुला है। हमे सब पता है।"
"तू कहना क्या चाहती है?" कमला नाराज हो गई।
"मुद्दे की बात सुन। नाराजगी छोड़। लड़के की शादी करना चाहती है तो एक लड़की है। बोल तो दिखा दूंगी।"
"कितनी बड़ी है?" कमला ने पूछा
"उम्र का क्या करना है। तलाक शुदा लड़के को तलाक शुदा लड़की ही मिलेगी। उम्र बराबर की समझ ले।" विमला ने स्पस्ट किया।
"कोई बच्चा?" कमला ने पूछा।
"कोई नही है। एक साल बाद ही तलाक हो गया था। लड़की स्कूल में टीचर है। लड़की मंदिर में दिखा दूंगी। पसंद हो तो आगे बात चला दूंगी।"
"कब दिखाएगी?"
"कल दिखा दूंगी। शाम को मंदिर ले आऊंगी।"
"ठीक है।"

अगले दिन मिलने की बात तय करने दोनों अपने-अपने घर रवाना हुई। घर पर कमला ने पति और बच्चों से इस विषय पर बातचीत की। पति कन्हैया ने पुत्र समीर के पुर्नविवाह पर सहमति जताई। पहले असफल विवाह से ज़िन्दगी ख़राब तो हो गई फिर भी दूसरे विवाह पर खुशियां लौट कर सकती हैं। जिन बातों पर तलाक हुआ उनको दोहराया जाये। गलतियों से सीख लेकर ज़िन्दगी में हमेशा आगे बढ़ना चाहिए। खुशियां फिर से चहक सकती हैं। लड़की का भी तलाक हुआ है ऐसे हालात में लड़का और लड़की परिपक्व हो जाते हैं और छोटी गलतियों को नजरअंदाज करके झगड़ा नही करते। समझौतों से गृहस्थी चलती है। जवानी के जोश में होश गंवा कर आजकल के युवा तलाक की राह पर चले जाते हैं। रात को समीर ऑफिस से वापस आएगा तो उससे बात करते हैं।
पिता कन्हैया की बात समीर को समझ गई और अगली शाम मंदिर में समीर और शर्मीला ने एक दूसरे को देखा। एक दूसरे से बातचीत की, विचारों को जाना और नौकरी पर चर्चा की। उनका तलाक किस कारण से हुआ किसी ने नहीं पूछा। अगले दिन दोनों विवाह के लिए सहमत हो गए। रविवार को दोनों परिवार एकत्रित हुए और शगुन दे कर विवाह पक्का किया।

समीर और शर्मीला ने एक दूसरे से मिलना शुरू किया। फोन पर बात और सिनेमा देखने के साथ महसूस किया कि ज़िन्दगी जीवन साथी के बिना अधूरी है। पहले की बात भूल कर नए सिरे से सोचना शुरू किया। जहां विचारों के मतभेद पर लड़ाई होती थी और तलाक तक बात खत्म हुई, आज उन्ही बातों को हंस कर टाल दिया। जीवन की नीरसता गायब हो गई और नयी ऊर्जा विकसित होने लगी।
"शादी के दिन क्या पहनोगे?" शर्मीला के इस प्रश्न पर समीर ने कहा "जीवन को संवारना है खुद नही सजना। एक सिंपल सा सूट पहन कर आऊंगा। हां तुम दुल्हन की तरह सजना।"
"क्यों? तुम दूल्हा मत बनो मैं दुल्हन की तरह संवर जाऊं?"
"श्रृंगार युवतियों का गहना है। अधिक नही तो थोड़ा सा श्रृंगार तो जरुरी है। हम तो घर में लुंगी पहन कर रहते है। स्त्रियां तो थोड़ा बहुत श्रृंगार घर में भी करती हैं।"
विवाह का दिन गया। अत्यंत सादे समारोह में समीर परिवार के साथ दोपहर के एक बजे शर्मीला के घर पहुंचे। कोई बैंड बाजा नही, कोई नाच गाना नही। कार में बैठ समीर का परिवार अपने नजदीकी रिश्तेदारों के साथ शर्मीला को लेने पहुंचे। कुल मिला कर सत्रह जने। दुल्हन पक्ष के भी उन्नीस जने थे। दुल्हन ब्यूटी पार्लर से लौटी नही थी। मंदिर के बाहर एक छोटी सी कनात में कुर्सियों पर बारातियों ने खाना खाया। खाना समाप्ति पर दुल्हन आई और सीधे मंडप में विवाह की रीतियां आरम्भ हुई। एक घंटे में सात वचनों और सात फेरों के साथ शुभ विवाह संपन्न हुआ। शर्मीला समीर के घर गई।

समीर और शर्मीला ने ऑफिस में भी किसी को नही बताया था। सिर्फ एक दिन की छुट्टी ली। अगले दिन दोनों ऑफिस पहुंचे।

समीर ने ऑफिस में अपने सहपाठियों को मिठाई खिलाई।
"किस ख़ुशी में मिठाई खिला रहे हो?" सहपाठियों ने पूछा।
"शादी की मिठाई है। खा लो।"
"किसकी शादी?"
"मेरी और किसकी।" शांत भाव से कह कर समीर ने लैपटॉप खोला।
"तेरी शादी। मजाक कर रहा है सुबह-सुबह?"
"मजाक नही सच है। मैंने जो कल जो छुट्टी की थी अपनी शादी के लिए की थी।"
"बुलाया भी नही शादी में?"
"भाग कर की है मंदिर में।"
"हम कैसे माने?"
"तो फिर फोटो देख लो।" समीर ने मोबाइल पर शादी की फोटो दिखाई और फेसबुक पर अपलोड कर दी।
"अब तो मान गए न।"

शर्मीला साधारण सी सलवार कमीज में ऑफिस पहुंची। हाथ में शादी का चूड़ा देख सभी दंग रह गए।
"शर्मीला चूड़ा?"
"शादी का है।"
"शादी?"
"कल जो छुट्टी की थी शादी कर ली।"
"बताया भी नही और बुलाया भी नही?"
"भाग कर की हैं मंदिर में इसीलिए।" कह कर शर्मीला ने मिठाई सबको खिलाई। अपना लैपटॉप खोला और फेसबुक पर फोटो अपलोड की।
खिलखिला कर शर्मीला हंसी और काम में जुट गई।
दिनों क्या वर्षों बाद आज समीर और शर्मीला खुल कर हंसे। जब जागो तभी सवेरा।


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