Monday, May 29, 2017

रक्षक


कितना खुश है तू आज
मेरे हाथों में सुरक्षित है
ऊंची उड़ान भर तू
तभी अपने से ऊंचा किया है
कोई शंका मत रख तू
मैंने अपनों को सहारा दिया है
मत डर ऊंची उड़ान भरने से
मत डर नीचे गिरने से
ऊंचा औऱ फिर नीचे
यही जीवन की गहराई है
मैं संपूर्ण जगत का तात
सब में मैं बसता हूं
एक बार अपना ले तू मुझे
तेरा रक्षक मैं ही हूं


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