Wednesday, May 17, 2017

रिटायर


सूरज सुबह देर तक सोता रहा। सुकन्या हड़बड़ी में उठी और बिस्तर छोड़ा। हर रोज सुबह साढ़े पांच बजे बिस्तर छोड़ने वाले सूरज और सुकन्या पौने सात बजे तक सोते रहे। सुकन्या ने सूरज को उठाया।
"सुनो सात बजे रहे हैं उठो, ऑफिस की देर हो जाएगी।"
अलसाई हालत में सूरज ने करवट बदली। "बुड्ढी हो गई है। अक्ल घास चरने गई है क्या?"
"क्या हुआ, सुबह के समय ऐसा क्यों बोल रहे हो?"
"भाग्यवान कल तो रिटायर हुआ हूं, ऑफिस में रिटायरमेंट पार्टी हुई थी और तुम भी थी पार्टी में।"
सुकन्या हंस दी "पैंतीस वर्ष रोज की दिनचर्या एक दिन में नही बदली जाती। आदत है सुबह नाश्ता और ऑफिस के लिए टिफ़िन, उसी धुन में याद ही नही रहा कि श्रीमान जी रिटायर हो गए।"
"आज से घर के काम मेरे जिम्मे।" सूरज ने एलान कर दिया।
"सोच लो कर नही सकोगे?"
"चिंता करो।"

सूरज ने जोश में कह दिया और सुकन्या ने हंस कर सुन लिया। उसे अहसास था कि सूरज ने आज तक घर के काम नही किये। सुबह आठ बजे ऑफिस के लिए जाना और रात को नौ बजे घर वापस आना। सरकारी नौकरी के बावजूद काम की लगन थी। सूरज ने चाय बनाई। चायकॉफ़ी और टोस्ट मक्खन तक तो ठीक है  परन्तु खाना बना तो लिया लेकिन बेसुवाद। सुकन्या तो बस मुस्कुरा दी। सूरज को अपना बनाया खाना पसंद नही आया।
"मजा नही आया तुम्हे बेसुवाद खाना खिला दिया।"
"घर के दूसरे काम संभालो, रसोई मेरे जिम्मे ही रहने दो। जिसका काम उसी को साजे।"

दो दिन तो आराम में बीत गए। जिस व्यक्ति ने अपने जीवन के चालीस वर्ष काम में झौंक दिए उस अच्छे भले व्यक्ति को रिटायर कर दिया कि अब बेकार हो गए, किसी काम के नही रहे। यह भी अजीब दस्तूर है। एक दिन में दुनिया पलट जाती है। काम वाला निकम्मा बन जाता है। अच्छी सेहत के बावजूद काम के अयोग्य समझ लिया जाता है। खैर नियम तो मानने पड़ेंगे। तीसरे दिन सूरज दीवारें देखने लगा कि क्या करे। घर में दो ही सदस्य स्वयं सूरज और पत्नी सुकन्या। बच्चे दूसरे शहर में नौकरी करते और रहते हैं। वो अपनी जिंदगी में मस्त और व्यस्त हैं।

सुकन्या ने कुछ काम तलाशने की सलाह दी।
"सरकारी और प्राइवेट नौकरी में फर्क होता है। सरकारी नौकरी में एक क्लर्क भी अफसर का रोब रखता है और प्राइवेट में अफसर भी क्लर्क होता है। कंपनी के मालिक से नही पटने पर दो मिनट में छुट्टी हो जाती है। मालिक की चापलूसी मेरे बस की बात नही है। पेंशन से अपना गुजारा आराम से होगा। अस्पताल के खर्चे के लिए सरकारी स्वास्थ्य सेवा है। मेरी समस्या समय बिताने की है।"
"रिटायर बुजुर्ग पार्क में ताश खेलते हैं। उनके साथी बन जाओ।" सुकन्या ने हंसते हुए कहा।
"यह काम तो सरकारी नौकरी में भी नही किया। अधिकतर सरकारी कर्मचारी ऑफिस समय में भी पार्क में ताश खेलते थे। मैं काम करता था तभी उच्च पद पर रिटायर हुआ। ताश खेलने वाले क्लर्क ही रिटायर होते हैं।"
सूरज और सुकन्या अब सुबह और शाम की सैर जाने लगे। रसोई सुकन्या ने पहले की तरह संभाली और बाकी काम सूरज ने। घर में काम करने वाले नौकरों को हटा कर सारे काम स्वयं करने लगे। उसके पश्चात भी आधा दिन खाली रहता।

बस अब पुरानी यादें अक्सर सूरज और सुकन्या याद करते कुछ तकरार के साथ और कुछ प्यार के साथ। कभी-कभी बच्चों के साथ कुछ दिन रहते फिर वापस अपने एकाकी जीवन में।  बस अब यही जिंदगी है अंतिम पड़ाव तक।



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