Friday, May 05, 2017

साया

मेरा साया मेरे संग है फिर क्या गम है
कभी छोटा कभी बड़ा फिर क्या गम है
धूप में भी देता साथ फिर क्या गम है
तन्हाई में भी संग है फिर क्या गम है

रिश्ते नाते छोड़ गए साया ही संग है
मुसीबत में हौसला देता साया ही संग है
खुशियों में नाचता साया ही संग है
अंतिम सांस तक साथ निभाता साया ही संग है


Post a Comment

हुए हैं जब से शरण तुम्हारी

हुए हैं जब से शरण तुम्हारी , खुशी की घड़ियां मना रहे हैं करें बयां क्या सिफ़त तुम्हारी , जबां में ताले पड़े हैं। सु...