Monday, July 31, 2017

हम अपना कर्म तो कर ही चुके


हम अपना कर्म तो कर ही चुके, अब कर्म तुम्हारा देखेंगे
जब शरण तुम्हारी ही गए, फिर कृपा तुम्हारी देखेंगे।

दुनिया की मोहब्बत को देखा, सब सखा संबंधी परख लिए
सुख में इन हंसने वालों ने, दुख में मेरा साथ दिया।

अब तू ही बता मेरे भगवन हम किसका सहारा देखेंगे
जब शरण तुम्हारी ही गए, फिर कृपा तुम्हारी देखेंगे।

तकदीर की चौखट पे हमने, कई दल के पासे देख लिए
अब रही मेरी चाह कोई सब रंग तमाशे देख लिए।

अब तेरी रजा के अंदर, हम करके गुजारा देखेंगे
जब शरण तुम्हारी ही गए, फिर कृपा तुम्हारी देखेंगे।

कुछ हंसते रहे कुछ रोये भी पर जीवन भर बैचैन रहे
एक तेरे दर्शन की खातिर, ये नैन मेरे बैचैन रहे।

जब बिछुड़े थे तब देखा था, अब मिलो दुबारा देखेंगे
जब शरण तुम्हारी ही गए, फिर कृपा तुम्हारी देखेंगे।

हम अपना कर्म तो कर ही चुके, अब कर्म तुम्हारा देखेंगे

जब शरण तुम्हारी ही गए, फिर कृपा तुम्हारी देखेंगे।

Saturday, July 29, 2017

सादा जीवन सुख से जीना


सादा जीवन सुख से जीना, अधिक इतराना चाहिए
भजन सार है इस दुनिया में, कभी बिसरना नही चाहिए

मन में भेद भाव नही रखना, कौन अपना कौन पराया
ईश्वर से सच्चा नाता है और सभी झूठा सपना

गर्व गुमान कभी करना, गर्व रहे गिरे बिना
कौन यहां पर रहा सदा से, कौन रहेगा सदा बना

सभी भूमि गोपाल लाल की, व्यर्थ झगड़ना चाहिए
दान भोग और नाश तीन गति धन की चौथी कोई

जतन करणता पच-पच मर गया, संग ले गया कोई
एक लख पूत सवा लख नाती, जाने जग में सब कोई

रावण की सोने की लंका, संग ले गया कोई

सुख से रहना खूब बांटना, भर-भर रखना चाहिए

Friday, July 28, 2017

भोगे भोग घटे नही तृष्णा


भोगे भोग घटे नही तृष्णा, भोग-भोग फिर क्या करना
चित में चेतन करे चांदना, धन माया का क्या करना

धन से भय विपदा नही मांगे, झूठा भरम नही करना
कर संतोष सुखी हो रहिये, पच-पच मरना चाहिए

सुमरण करें सदा ईश्वर का, साधु का सम्मान करें
कम हो तो संतोष करें नर, ज्यादा हो तो दान करें

जब-जब मिले भाग जैसा, संतोषी ईमान करें
उल्टा-पुल्टा घणा बखेड़ा, जुल्मी बेईमानी करें

निर्भय जीना निर्भय मरना, मोहन डरना चाहिए
सादा जीवन सुख से जीना, अधिक इतराना नही चाहिए

भजन सार है इस दुनिया में, कभी बिसराना नही चाहिए

षड़यंत्र

कुछ तनतनी सी लगती हो कुछ अनबनी सी लगती हो क्यों झगलाड़ू सी लगती हो क्यों चंडी सी लगती हो मुझे किसी षड्यंत्र ...