Friday, August 18, 2017

हुए हैं जब से शरण तुम्हारी


हुए हैं जब से शरण तुम्हारी, खुशी की घड़ियां मना रहे हैं
करें बयां क्या सिफ़त तुम्हारी, जबां में ताले पड़े हैं।

सुना था जैसा ही पाया तुम को, खुशी बहुत भारी है हमको
रहेंगे खिदमत में हम हमेशा, यही दिलों में ठाने हुए हैं।

लिया मोहब्बत में नाम तुम्हारा, हुआ है रोशन यह दिल हमारा
अंधेरे घर मे चिराग रोशन, जिधर भी देखो दमक रहे हैं।

बहार गुलशन की है गुलों से, हमारी शौहरत भी है तुम्ही से
इसी वजह से प्यारे दिलबर, तुम्हारे दर पर खड़े हुए हैं।

की है मेहर की नजर जो हमपर, निसार जिंदगानी हो तुमपर
तुम्हारे कदमों पर मेहरबान, सर झुकाए पड़े हुए हैं।

ख़्वाहे हस्ती जहां में सारी, जो की उल्फत तुम्हारी
उन्ही के देखो इस जहां में, जानों के लाले पड़े हुए हैं।

करेंगे हर दम हम यादगारी, अगर इनायत हो तुम्हारी
दस्त बस्ता कृष्ण प्यारे, तुम्हे अजर यह सुना रहे हैं।

हुए हैं जब से शरण तुम्हारी, खुशी की घड़ियां मना रहे हैं

करें बयां क्या सिफ़त तुम्हारी, जबां में ताले पड़े हैं।

Saturday, August 05, 2017

डूबतों को बचा लेने वाले


डूबतों को बचा लेने वाले, मेरी नैया है तेरे हवाले
लाख अपनों को मैंने पुकारा, सब के सब कर गए किनारा
और कोई देता दिखाई, सिर्फ तेरा ही अब तो सहारा
कौन तुझ बिन भंवर से निकाले, मेरी नैया है तेरे हवाले
डूबतों को बचा लेने वाले, मेरी नैया है तेरे हवाले

जिस समय तू बचाने पे आये, आग से भी बचा कर दिखाये
जिस पे तेरी दया दृष्टि होवे, कैसे उस पे कोई आंच आये
आंधियों में भी तू ही संभाले, मेरी नैया है तेरे हवाले
डूबतों को बचा लेने वाले, मेरी नैया है तेरे हवाले

पृथ्वी सागर पर्वत बनाये, तूने धरती पे दरिया बहाये
चांद सितारे करोड़ों सितारे, फूल आकाश में भी दिखाये
तेरे सब काम जग से निराले, मेरी नैया है तेरे हवाले
डूबतों को बचा लेने वाले, मेरी नैया है तेरे हवाले

बिन तेरे चैन मिलता नही है, फूल आशा का खिलता नही है
तेरी मर्जी बिना इस जहां में, एक पत्ता भी खिलता नही है
तेरे बस में अंधेरे उजाले, मेरी नैया है तेरे हवाले

डूबतों को बचा लेने वाले, मेरी नैया है तेरे हवाले

औरों से

क्यूं करते हो गिला औरों से
क्यूं करते हो शिकवा औरों से
क्यूं करते हो तुलना औरों से
क्यूं रखते हो आस औरों से
क्यूं नही रखते खुद पर उम्मीद
क्यूं नही बढ़ते आगे हौसला करके
क्यूं नही बनते मिसाल औरों के लिए
क्यूं नही बदलते आस को आशा में
क्यूं मिलेगा तुम्हे औरो से
क्यूं नही देते स्वयं बन औरों  को


हुए हैं जब से शरण तुम्हारी

हुए हैं जब से शरण तुम्हारी , खुशी की घड़ियां मना रहे हैं करें बयां क्या सिफ़त तुम्हारी , जबां में ताले पड़े हैं। सु...