Friday, January 12, 2018

बचपन

वो उन्मुक्त बचपन
वो खेलता बचपन
पतंग उड़ाता बचपन
तितलियां पकड़ता बचपन
पढ़ने के बहाने ढूंढता बचपन
याद आता बचपन
बस अब सबकी सुनते हैं
अपने मन की कहां कर पाते हैं
अफसर की झिड़की पत्नी के ताने
संवारना है बच्चों का जीवन
बूढ़ा होता शरीर सोचता है

वो उन्मुक्त बचपन
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