Monday, July 02, 2018

पांच कन्याएं


बीए अंतिम वर्ष में अधिकांश छात्र पढ़ाई में व्यस्त थे। आगे कैरियर औऱ पढ़ाई की योजनाओं को अंतिम रूप दे रहे थे। टिया जनवरी के माह में निश्चिन्त हो गई। अब उसका ध्येय सिर्फ बीए की डिग्री लेना ही था चाहे अंक कितने ही आएं। आगे उसने पढ़ाई करनी नही।
"रिया एक बात बताऊं।" टिया ने रिया के कान में फुसफुसाते हुए कहा।
"कौन सी बात है?" बेफिक्र होकर किताब बंद करते रिया ने टिया की और देखते हुए पूछा।
"यहां नही बाहर चल कर बताती हूं।" टिया ने रिया को उठने को कहा।
टिया और रिया लाइब्रेरी से बाहर आकर कॉलेज के गार्डन में एक पेड़ के नीचे बैठते हैं। सर्दियों की गुनगुनी धूप अच्छी लग रही थी।
"बता टिया ऐसी कौन सी खास बात है जिसे बताने के लिए तूने लाइब्रेरी में नोट्स भी नही बनाने दिए।"
"रिया मेरी शादी हो रही है। कल रिश्ता पक्का हो गया है।" चहकते हुए टिया ने कहा।
रिया ने टिया को देखा। एक गजब की मुस्कान उसके चेहरे पर थी और आत्मविश्वास के संग उसका बदन दमक रहा था।
"इतनी जल्दी भी क्या है शादी की। आगे पढ़ना नही है क्या?" रिया ने टिया से पूछा।
"देख घर बैठे अपने आप रिश्ता आया है। अभी पिछले रविवार को पापा के व्यापारी के बेटे की शादी थी। हमारा पूरा परिवार शादी में सम्मलित था। वहीं लड़के ने मुझे देखा औऱ मैंने लड़के को। बस कल बात पक्की हो गई।"
"लड़का क्या करता है?"
"अपना कारोबार है। पापा को अच्छी तरह जानते हैं। तभी तो मुझे शादी में ले गए थे।" टिया ने मटकते हुए आंखों में शरारत लाते हुए जवाब दिया।
"टिया बस दो चार मिनट लडके को देख कर तुमने लड़का पसंद भी कर लिया। मतलब लड़का कैसा है, उसकी पसंद क्या है, उसकी आदतें क्या हैं?" रिया ने हैरानी से पूछा।
"रिया मुझे देख। मध्यम कद, सांवला रंग औऱ साधरण फिगर्स के साथ थोड़ी मोटी भी हूं। कॉलेज में मुझसे कोई लड़का दोस्ती भी नही करता है। मैं लड़कों के पीछे क्यों भागूं जब घर बैठे रिश्ता आ गया तब ना नकुर करने का कोई फायदा नही है। अब शादियां तो ऐसे ही होती है। मैं अपने परिवार में देखती हूं जहां घर वाले सुझाते हैं शादी कर ही लेते हैं।"
"और प्यार का क्या? बिना प्यार शादी?"
"प्यार शादी के बाद।"
"मेरा मतलब प्यार का समय ही कब मिलेगा? मुश्किल से एक दो महीना। फिर बच्चे और गृहस्थी के चक्कर।"
"रिया जिंदगी इसी को कहते हैं। फिल्मी प्यार नसीब से इक्का दुक्का को ही मिलता है। अपनी शक्ल सूरत भी आईने में देखनी चाहिए। साधारण लड़कियां हैं, अप्सरा तो हैं नही जो हमारे पीछे लड़के घूमेंगे।"

टिया की बात पर रिया विश्लेषण करने लगी। टिया कह तो सही रही है फिर भी अपने को कम क्यों आंकें। टिया धनी परिवार की लड़की थी। व्यापारिक घराने से रिश्ता आया और उसने स्वीकार कर लिया। आराम से जिंदगी कटेगी। घर में काम करने के लिए नौकर और आराम की हर सुख सुविधा के लिए रुपयों का अंबार। हर हसरत पूरी होगी। जीवन में किसी भी चाह को पूरा करने के लिए मन को नही मारना पड़ेगा। फरवरी में टिया का विवाह धूमधाम से सम्पन्न हुआ। रिया टिया के परिवार की रईसी देखती रह गई। एक मध्यम वर्गीय परिवार से ताल्लुक रखने वाली रिया को टिया का निर्णय उचित लगा। अब दोनों की दुनिया में जमीन आसमान का अंतर है। जहां टिया की हर ख्वाइश पूरी होती है वहां उसे छोटी छोटी बातों पर अपनी चाहतों को दबाना पड़ता है।

विवाह के बाद टिया ने कॉलेज आना छोड़ दिया। बस परीक्षा देने आई। तीसरी श्रेणी में उत्तीर्ण होकर टिया ऐसे चहक रही थी जैसे उसने हिमालय पर्वत की चढ़ाई पूरी कर ली।

टिया के विवाह करने का कारण रिया को समझ आ गया। रिया के परिवार ने रिया को आगे पढ़ने और अपने पैरों पर खड़े होने की प्रेणना दी। रिया की शादी की इतनी जल्दी उसके परिवार को नही थी। रिया के पिता के रिटायरमेंट में अभी चार वर्ष शेष थे इसलिए वे तब तक रिया का विवाह खर्च उठाने की हैसियत में नही थे। भविष्य निधि की जमा रकम से रिया के विवाह खर्च की उसके पिता की सोच थी। पेंशन और ग्रतुईटी अपने बुढ़ापे का सहारा बनाने की योजना पिता ने बनाई। रिया अपने परिवार की आर्थिक मजबूरी अच्छी तरह समझती थी।
मास्टर्स डिग्री के दौरान रिया की मित्रता श्रुति से हुई। श्रुति आकर्षक व्यक्तित्व की स्वामिनी थी। लंबा कद, गोरा चिट्टा रंग, पतली कमर, तीखे नैन और आदर्श फिगर। कॉलेज का हर लड़का उसका दीवाना था। श्रुति का ध्यान पढ़ाई में कम लगता था। वह सारा दिन सैर सपाटे में लड़कों संग निकालती थी। रिया के संग मित्रता नोट्स के बहाने हुई। श्रुति के संग रहने के कारण रिया के भी बहुत मित्र बन गए। रिया को यह अहसास था कि उसके साथ मित्रता श्रुति के नजदीक आने के लिए हो रही है।

एक दिन श्रुति रिया को अपने साथ शॉपिंग पर ले गई।
"श्रुति आज कोई खास बात है क्या जो मुझे शॉपिंग के लिए साथ लिया, वर्ना तुम हमेशा लड़कों संग घूमती हो?
रिया के इस प्रश्न पर श्रुति खिलखिला कर हँस दी। "अरे पगली आज उनके साथ शॉपिंग नही करनी है। अगले महीने मेरी मौसी की लड़की की शादी है। शादी में पहनने के लिए कुछ कपड़े खरीदने है। सबसे जरूरी लहँगा खरीदना है। उनको क्या अक्ल कि लहँगा क्या होता है और कौन सा खरीदना है। सब बेवकूफ है उनको मेरा जिस्म नजर आता है और कुछ नही।"
"फिर उनके साथ क्यों रहती हो?"
"कॉलेज आओ, पढ़ाई करो। बड़ी नीरस जिंदगी है इसमें कुछ नयापन और रोमांच और रोमांस होना चाहिए। इसलिए लड़कों संग मौज मस्ती में रहती हूं।"
"कुछ ऊंच-नीच हो जाये तब क्या होगा?"
"आज के आधुनिक युग मे सुरक्षा के साधन हर जगह आसानी से उपलब्ध हैं। डरना किस बात से रिया पगली।"
"तेरे घर वालों को मालूम है क्या?"
"मौज मस्ती घर वालों के सामने नही की जाती है। उनको इतना पता जरूर है कि मेरे बॉय फ्रेंड हैं।"
"फिर भी कुछ नही कहते तुझको?"
"उनकी समस्या मैंने हल कर दी है।"
"कौन सी?"
"शादी की। अपनी पसंद के लड़के से शादी करूँगी। प्रेम विवाह में खर्च भी कम आएगा। तू तो जानती है शादी का खर्च। माँ-बाप गंजे हो जाते हैं।"
"शादी तो एक से करनी है फिर इतने सारे क्यों पाल रखे हैं?"
"सिर्फ मौज मस्ती के लिए। मैंने किसी को नही पाल रखा है। वो मुझे पाल रहे हैं। मेरा सारा खर्च वोही करते है। जिस विलासता में मैं रहती हूँ उस का खर्च नौकरी पेशा मेरे माँ-बाप नही कर सकते। हम चार भाई बहन हैं।"
श्रुति ने जब मंहगा लहँगा खरीदा तब रिया ने उसे टोका कि सस्ता लहँगा भी अच्छा लग रहा है तब हँस कर श्रुति ने रिया के गाल पर हल्की सी चपत लगा दी। "कौन से मेरे बाप का खर्च हो रहा है। सब मेरे मजनूओं की जेब से निकलेगा।"

श्रुति के जीने के ढंग से रिया हैरान हो गई। वह इस तरह का जीवन सोच ही नही सकती। उसने अपने परिवार में समस्त जीवन अपने जीवन साथी को समर्पित होते देखा है। उसके संस्कार इतना उन्मुक्त उड़ कर जीना नही सिखाते हैं।
श्रुति ने अपने मित्रों को अपनी मौसी की लड़की की शादी में आमंत्रित किया। रिया ने शराब के नशे में श्रुति को अपने मित्रों और रिश्तेदारों संग खूब मौज मस्ती करते देखा। असहज रिया अधिक देर तक विवाह समारोह में नही रुकी और बहाना बना कर शीघ्र घर लौट गई। उस दिन के बाद रिया श्रुति से दूरी रखने लगी। श्रुति और रिया की मित्रता अब सिर्फ नोट्स तक सीमित हो गई।

मास्टर्स डिग्री लेने के पश्चात रिया और श्रुति के रास्ते अगल हो गए। रिया नौकरी करने लगी। कंपनी की नववर्ष की पार्टी में रिया अपने सहकर्मियों संग एक पांच सितारा होटल में डिनर करने के पश्चात होटल से बाहर आ रही थी वहां उसका आमना-सामना श्रुति से हो गया। श्रुति एक अधेड़ उम्र के गंजे गोल मटोल व्यक्ति की बाहों में झूलती हुई अचानक से उसके सामने टकरा गई तब खुद ही रिया के मुख से निकल पड़ा "श्रुति हाए।"
"रिय़ा व्हाट आ प्लीजेंट सरप्राइज? आज कितने दिन बाद मिल रहे है। छोड़ो इन बात को। रिया मीट माई हस्बैंड।"
हस्बैंड शब्द सुनते ही रिया भौचक्की हो गई। श्रुति दो मिनट के लिए रिया को एकांत के एक कोने में ले गई।
"ऐसे क्या देख रही है। तबियत तो ठीक है न?" श्रुति ने रिया को झंझोरते हुए पूछा।
"श्रुति क्या तुमने शादी कर ली। वो तुम्हारा हस्बैंड?"
"अरे यार तू अभी भी बदली नही है। वैसे पुराने घिसे पिटे खयाल। कॉलेज से आज तक वैसे ही है।"
"मेरा मतलब कॉलेज में तू खूबसूरत हैंडसम हीरो टाइप लड़को के संग रहती थी। क्या सोच कर अपने से बड़ी उम्र के अंकल टाइप अधेड़ से शादी कर ली। कोई भी मेल नही है तुम दोनों में। तुम अभी भी कॉलेज के समय वाली हसीना हो औऱ तुम्हारा पति?" मुझे कुछ समझ नही आ रहा है।"
"कभी फुरसत में बताऊंगी। मेरा नंबर ले। अच्छा अभी चलती हूँ।"
श्रुति होटल में प्रवेश करती है और रिया घर की और रवाना होती है।

अगले दो दिन रिया श्रुति के बारे में सोचती रही कि क्या सोच कर उसने अधेड़ से विवाह किया लेकिन उसने श्रुति को फोन नही किया।
शनिवार के दिन रिया के ऑफिस में आधे दिन की छुट्टी होती है। ऑफिस के बाद रिया अपने सहकर्मियों के साथ फ़िल्म देखने गई। रिया को श्रुति दिख गई जो आज एक नवयुवक की बाहों में झूल रही थी। श्रुति को देख कर रिया परेशान हो गई। विवाह अधेड़ से किया और प्रेम युवा से कर रही है। उसकी नजर में यह अपराध है। उसकी आंखें सिनेमा के पर्दे पर थी लेकिन मन मे श्रुति के बारे में अनेकों प्रश्न थे। अगले दिन उसने श्रुति से फोन पर बात कर उससे मिलने की इच्छा जाहिर की। शाम के समय मॉल में श्रुति और रिया मिले। कॉफ़ी शॉप में एक कोने की टेबल पर एकांत में रिया ने श्रुति से कई सवाल किए। श्रुति ने रिया को बताया कि उसका पति तलाकशुदा बहुत अमीर है। सारा दिन और रात व्यापार को और आगे बढ़ाने के लिए देश विदेश घूमता है। उसको अपने बिज़नेस सर्किल में खूबसूरत जवान सेक्सी बीवी दिखानी थी जिस कारण उसने मेरे से विवाह किया और मुझे एक रईस पति की तलाश थी जिसके पैसों पर मैं हर सुख सुविधा भोग सकूं। मेरा परिवार इस विवाह के खिलाफ था। हमारी उम्र में बीस वर्ष का अंतर है। हम दीवाली मेले पर मिले थे जहां मुझे खूबसूरत युवती का इनाम मिला था। मुख्य अतिथि मेरे पति थे। उस दिन के बाद हम नजदीक आ गए। उससे मेरी आर्थिक जरूरते पूरी होती हैं और तुम्हे मालूम ही है कि कॉलेज के समय से ही मेरे आशिकों की लंबी कतार थी, उनसे मेरे तन की जरूरतें पूरी होती हैं।

रिया को श्रुति से सभी प्रश्नों का जवाब मिल गया लेकिन खिन्न मन से उसने श्रुति से कभी न मिलने का वादा करके रुक्सत ली।

टिया और श्रुति के विवाह के कारण जुदा थे। एक अमीर परिवार की मोटी और साधारण टिया ने परिवार की पसंद से विवाह कर लिया। उसका कोई बॉय फ्रेंड नही था। श्रुति के आगे पीछे बॉय फ्रेंड्स की लंबी लाइन थी फिर उसने सबको छोड़ अमीर अधेड़ तलाकशुदा से विवाह किया। विवाह करने के सबके कारण अगल हैं।

ऑफिस में रिया की घनिष्ठ मित्र सोनम ने एक दिन उसे ऑफिस के बाद अपने घर चलने को कहा।
"रात को देर हो जाएगी। तुझे मालूम है कि नौ बजे तक मैं घर पहुंच जाती हूँ।"
"अधिक देर नही होगी। मैं तुझे तेरे घर छुड़वा दूंगी। मेरा भाई कार में छोड़ कर आएगा।"
"आखिर क्या कुछ खास है?"
"हाँ यार लडके वाले मेरे घर आ रहे हैं। मैंने और लड़के ने एक दूसरे को देखना है। घर वालों ने बात पक्की कर ली है।"
"हैरानी की बात है कि परिवार राजी और लड़का-लड़की अनजान?"
"क्या करूँ पिछले चार वर्षों से कई रिश्ते आये परंतु कुंडली न मिलने के चक्कर मे बात ही नही बनी। इस बार कुंडली मिल गई है। मैंने तो बस इतना देखना है कि लड़का आड़ा टेड़ा न हो।"
"कोई पसंद नही सिर्फ कुंडली?" रिया फिर परेशान होकर सोचने लगी कि शादी करने की भी क्या अजीब कारण हैं। रिया सोनम के साथ गई। लड़का साधारण कद का थोड़ा मोटा था। दोनों ने दो मिनट में एक दूसरे को पसंद कर लिया।
सोनम के लिए रिया लकी साबित हुई कि उसके साथ होने के कारण चुटकियों में रिश्ता पक्का हो गया। सोनम के परिवार ने खूबसूरत भेंट देकर रिया को उसके घर छोड़ा।
"सोनम तेरी अपनी कोई पसंद नही। कुंडली के आधार पर विवाह मंजूर कर लिया।"
"क्या करूँ घर से भाग कर शादी करने की हिम्मत नही हुई। परिवार की इज्जत और समाज की बेड़ियां अपनी पसंद को बांध लेती हैं। मजबूरी में जो मिले उसके साथ जीवन गुजरता है।"

विवाह के कारणों में हर व्यक्ति की सोच जुदा है। प्रकृत्या मुख्य कारण अवश्य है फिर भी पारिवारिक, आर्थिक, शारीरक और सामाजिक कारणों से विवाह करने की वजह जुदा होती है।

एक दिन शाम को रिया ऑफिस से लौटी तब घर में उदासी औऱ मातम छाया हुआ था। दस मिनट पहले उसकी मौसेरी बहन के पति (जीजा) के एक्सीडेंट की खबर आई। सड़क दुर्घटना में उसके जीजा को गंभीर चोटें आई और अस्पताल में नाजुक हालत है। उसके माता-पिता अस्पताल की ओर दौड़े।

रिया की मौसेरी बहन बहुत खुशमिजाज और बहुत ही खूबसूरत थी। एक वर्ष पहले उसने प्रेम विवाह किया था औऱ सात महीने का गर्भ था। रिया की बहन और जीजा बहुत ही खूबसूरत और खुशमिजाज थे। कॉलेज में दोनों प्रेम बंधन में बंधे औऱ सात वर्ष के प्रेम के बाद दोनों का परिवार की सहमति से विवाह संपन्न हुआ।

तीन दिन तक घर मे माहौल बहुत ही उदासी का रहा। ऑफिस से छुट्टी लेकर रिया अपनी बहन के पास रही। बाकी सारा परिवार अस्पताल में छावनी बना कर रह रहा था। तीन दिन बाद अनहोनी हो ही गई। रिया के जीजा का निधन हो गया। पति की असमय मौत से रिया की बहन पर वज्रपात गिरा औऱ सात महीने के गर्भ को सह न सकी। समय से पूर्व एक सुंदर बेटी का जन्म हुआ। समय से पहले जन्म के कारण बेटी का वजन कम था जिस कारण उसे अस्पताल की नर्सरी में रखा गया।

रिया की बहन तो चार दिन बाद अस्पताल से घर आ गई लेकिन गुमसुम उदास रहती। पति के गुजर जाने के बाद औऱ बेटी के उससे दूर अस्पताल में रहने के कारण वह अपनी सुधबुध खो बैठी। दीवारों से बातें करती रहती। रिया की कोई ननद नही थी। उसकी सास बुजुर्ग थी इस कारण बहन का साथ देने रिया अपनी बहन के संग रहने लगी।
समय ही घाव देता है औऱ वही भरता है। बेटी के अस्पताल से घर आने पर बहन की दिनचर्या बदली औऱ छोटे बच्चे के साथ व्यस्त हो गई।

रिया की मौसेरी बहन के दो देवर थे। एक देवर उससे एक वर्ष छोटा था औऱ दूसरा तीन वर्ष छोटा था। बड़े बेटे के बरसी होने के बाद बहन के ससुराल ने उसके देवर से विवाह प्रस्ताव रखा।
"हमारे बेटे और बहू ने सात वर्ष के प्रेम के पश्चात सात जन्म एक साथ बिताने के लिए पवित्र अग्नि के सात फेरे लिए थे। हम चाहते हैं कि बहू हमारे दूसरे बेटे के संग विवाह कर ले। समाज भी जवान बेटे की मृत्यु के पश्चात कुंवारे देवर के संग विवाह की मान्यता देता है। यदि आपके परिवार को कोई ऐतराज हो तो हमे अवगत कराएं।"
रिया के मौसा ने यह प्रस्ताव तुरंत स्वीकार कर लिया। विवाह के पश्चात बेटी का जीवन संवर कर दुबारा पटरी पर आ जाएगा। पूरी जिंदगी विधवा का जीवन काटना बहुत मुश्किल है। छोटे बच्चे के साथ दुबारा विवाह असंभव होता है। रिया की बहन ने भी विवाह प्रस्ताव स्वीकार कर लिया।

"दीदी तुम जीजा से कितना प्रेम करती थी। एक दूसरे के लिए तुम बने थे। क्या तुम अपने देवर को पति के रूप में स्वीकार कर सकोगी?"
रिया के इस प्रश्न पर उसकी दीदी ने गर्दन झुका कर अपनी स्वीकृति दी। "रिया कुछ बातें हमारे बस में नही होती हैं। मैंने सात वर्ष तक प्रेम किया। शुरू में हमारा परिवार हमारी शादी के खिलाफ था फिर उन्हें झुकना पड़ा। जीवन और मौत ऊपर वाले के हाथ में है। यह फिल्मी डायलॉग जरूर है लेकिन जीवन का कटु सत्य भी है। कल क्या होगा किसी को नही मालूम। हँसता खेलता मानव पल भर बाद रोने को मजबूर हो जाता है। यही मेरे साथ हुआ है। कोई सोच भी नही सकता था कि ऐसा होगा। एक छोटे बच्चे के साथ विधवा का पूरा जीवन बिताना बहुत कठिन है।"
"तुम्हारी और जीजा की जोड़ी अतुलनीय थी। एक समान खूबसूरत। देवर का रंग भी सांवले से काला औऱ मोटा भी है। कहाँ जीजा जी और कहाँ देवर। कोई भी मेल नही है दीदी।"
"रिया मजबूरी में मेल नही देखा जाता है। जो मिल जाये वही किस्मत का लिखा मान संतोष करना पड़ता है। परिवार की सहमति में मेरी इच्छा समझ ले।"
एक महीने बाद विवाह का शुभ मुहूर्त निकला। विवाह की तैयारियां आरम्भ हो गई। विवाह की तैयारियों के बीच सबसे छोटा देवर रोहन रिया के नजदीक आने लगा। अक्सर एक साथ शॉपिंग में जाते और राय, विचार विमर्श के बीच रिया और रोहन एक दूसरे के नजदीक आ गए इसका अहसास रिया को नही हुआ लेकिन रोहन रिया के बारे में अधिक रुचि लेने लगा। रोहन की कोशिश रिया के नजदीक रहने की होती। रिया की मौसेरी बहन रोहन की बढ़ती नजदीकियों की भाँप गई। हालांकि रिया नजदीकियों को अधिक तवज्जो नही दे रही थी लेकिन उसकी बहन ने अपने सास-ससुर से इस बारें में बात की और उन्होंने इस रिश्ते को अपनी स्वीकृति प्रदान दी और रिया के माता-पिता को विवाह प्रस्ताव भेजा। रिया के परिवार को इस प्रस्ताव पर कोई आपत्ति नही हुई। उन्होंने रिया की पसंद पर बात छोड़ दी।

"रिया तुम्हे रोहन कैसा लगता है?" बहन ने एक रात बिस्तर पर नन्ही को सुलाते समय पूछा।
रिया इस प्रश्न पर चौंक गई। "दीदी यह कैसा प्रश्न है?"
"सीधा सादा प्रश्न है। तुम्हारी उम्र विवाह योग्य है, रोहन तुम्हे पसंद कर रहा है इसलिए तुमसे तुम्हारी राय जाननी है। रोहन अच्छा लड़का है। इस रिश्ते पर हम सब की सहमति है। अंतिम निर्णय तुम्हारा है।"
"कमाल है दीदी सब कुछ तय करके मेरी राय पूछी जा रही है। जिसने शादी करनी है उसकी पसंद और मर्जी की कोई कीमत नही है।"
"तुम्हारी मर्जी के खिलाफ कुछ नही होगा। यहां तुम कहोगी तुम्हारा विवाह वहीं होगा। मैंने प्रेम विवाह किया तुम पर जबरदस्ती नही होगी। अब दूसरा विवाह मेरी मजबूरी है उसके कारण जुदा हैं।"
"दीदी तुम बताओ अपनी विवाह की वजह?"
"मैं और तुम्हारे जीजा कॉलेज में एक साथ पढ़े। ग्रेजुएशन और मास्टर्स एक साथ किये। पढ़ाई और नोट्स बनाते समय एक दूसरे के खयालात समझने लगे। एक दूसरे की रुचियां समझी और जानी। हमारी सोच एक होती गई। हम एक दूसरे के जज्बात समझने लगे। जब हम एक दूसरे के सुख-देख बाटने लगे तब हमने विवाह करने का निर्णय लिया। विवाह तन के साथ मन का भी मिलन है। जब तक मन न मिलें विवाह बेमेल होता है।"
"दीदी मैं आपकी बातों से सहमत हूँ कि जब तक मन का मिलन नही हो विवाह का नही सोचना चाहिये।"
"इसके लिए तुम रोहन से मिल सकती है अपने दिल की बात उससे बांट सकती हो औऱ उसके मन को परख सकती हो।"
"दीदी इसमें समय लगेगा।"
"रिया तुम भरपूर समय लो। जल्दी में कोई निर्णय के लिए मैं तुम पर दबाव नही डालूंगी। चाहे एक वर्ष लग जाये। यदि तुम्हारी कोई अगल पसंद है तब मुझसे बिना किसी संकोच के कहो।"
"दीदी अभी तक तो मैं किसी के प्रेम में नही हूँ। विवाह के सबके अगल कारण देखे इसलिए सही कारण ढूंढने की तलाश में हूँ।"
"मेरी शुभकामनाएं तुम्हारे संग हैं।"

रिया रोहन को समझने के लिए उसके नजदीक रहने लगी। विवाह की रस्मों और फेरों के बीच पंडित जी विस्तार से साथ फेरों का अर्थ बात रहे थे। रिया ध्यानपूर्वक पंडित जी के द्वारा बताए सात फेरों का अर्थ समझ रही थी।
"बहुत ध्यान से पंडित जी के प्रवचन सुन रही हो। इतना ध्यान तो दुल्हन और दूल्हा भी नही दे रहे हैं।" रोहन ने रिया को छेड़ते हुए कहा।
"मेरे से बात करनी है तो पंडित जी को ध्यानपूर्वक सुनो। आज तुम्हारी परीक्षा है। यदि परीक्षा में अच्छे नंबरों से उत्तीर्ण हुए तब बात करूँगी नही तो मेरा तुम्हारा रास्ता अलग-अलग।"
इतना सुनते रोहन के होश उड़ गए और सावधान मुद्रा में पंडित जी की व्याख्या सुनने लगा। रिया पर लट्टू रोहन रिया को किसी भी हालत में नाराज नही करना चाहता था।

पंडित जी हर फेरे के पश्चात फेरे का मतलब समझा रहे थे।
पहला फेरे का अर्थ है कि सांस्कृतिक, सामाजिक, आर्थिक, आध्यात्मिक, धार्मिक आदि जैसे सभी प्रमुख निर्णयों के लिए एक दूसरे से परामर्श करना।
दूसरे फेरे का अर्थ है कि अच्छे दोस्त बन कर, एक गहरी समझ विकसित करके, एक दूसरे के और परिवार के लिए प्रति दायित्व का निर्वाह करें।
तीसरे फेरे का अर्थ है कि एक दूसरे का, एक दूसरे के माता पिता और परिवार का सम्मान करें।
चौथे फेरे का अर्थ है कि एक दूसरे के प्रति वफादार रहें।
पांचवे फेरे का अर्थ है कि परिवार और सामाजिक परंपराओं से मार्गदर्शित हो।
छठे फेरे का अर्थ है कि उनके परिवारों के बीच सामंजस्य बनाए रखें।
सातवें फेरे का अर्थ है कि संकट और बीमारी के समय के दौरान मजबूत और शांत रहें।
फेरे समाप्त होने पर रिया ने रोहन से पूछा। "पाठ याद हुआ?°
"जी मेम, पूरा कंठस्थ है। जब चाहे परीक्षा लीजिये।" रोहन ने सर झुका कर आदर्श विद्यार्थी की भांति कहा।
"पहले साप्ताहिक, फिर मासिक, फिर अर्धवार्षिक के बाद वार्षिक परीक्षा के अंक मिल कर औसत निकाला जाएगा। कम से कम अस्सी प्रतिशत आने जरूरी हैं वरना फेल।" रिया ने मुस्कुराते हुए कहा।
"बडी कठिन परीक्षा है मेम, कुछ राहत मिलेगी?"
"नकल भी नही चलेगी। मन में और दिल दिमाग में कंठस्थ कर लीजिए।"
शादी के अगले दिन रिया अपने घर लौट गई। रोहन और रिया अक्सर छुट्टी वाले दिन मिलने लगे। लोंग ड्राइव, सिनेमा और मॉल घूमते हुए रिया रोहन के दिल को टटोलती। दोनों एक दूसरे को समझने लगे और सोच एक होने लगी। एक दूसरे की भावनाओं की कद्र करने लगे। हर पारिवारिक विषय पर चर्चा करने लगे। छ महीने में वे एक दूसरे पर समर्पित हो गए और रिया ने विवाह के लिए हाँ कह दी।

विवाह के मंडप पर रिया ने रोहन को छेड़ते हुए कहा। "सात फेरों का मतलब याद कर लेना। अगर भूल गए हो तो परीक्षा से पहले अंतिम मौका है।"
"क्या मतलब है तुम्हारा?"
"ध्यानपूर्वक सुन कर रट लो।"
सुहागरात पर रोहन ने रिया के गाल पर हल्का चुंबन अंकित किया। "बिना परीक्षा के पास कर दिया मेम आपने।"
"श्रीमान जी हर रोज आँखों-आँखों मे बातों-बातों में परीक्षा लेती थी।"
"फिर कितने नंबर दे रही हो?"
"वफादार रहोगे?"
"शत प्रतिशत।"
"अच्छे मित्र बन कर परिवार के दायित्व निभाओगे?"
"शत प्रतिशत।"
"सुख और दुख में एक सामान व्यवहार करोगे और शांत रह कर मजबूत साथ दोगे?"
"शत प्रतिशत।"
"श्रीमान जी अंक भी आपको मिलते हैं शत प्रतिशत।"
रिया ने अपना होंठ आगे किये और दो तन एक हो गए।





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किस्मत

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